जगरनाथ महतो के निधन से उनकी पत्नी बेबी देवी को उपचुनाव में उतारा जा सकता है

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रांची | झारखण्ड में झामुमो की राजनीति ट्रिपल एम पर टिकी हुई है. मांझी, महतो ओर मुस्लिम समीकरण को साधकर झामुमो सूबे में राजनीति करता आया है. दिशोम गुरु शिबू सोरेन के समय में ही इस समीकरण को आजमाया गया था जिससे झामुमो को एकीकृत बिहार के समय दक्षिण बिहार में जबरदस्त सफलता मिली थी. गुरूजी से उतरदायित्व मिलने के बाद अब उनके पुत्र और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने इस समीकरण पर काम जारी रखा है. नतीजा यह है कि आज वह सत्ता में हैं. अब जब झामुमो ने जगरनाथ महतो के निधन के बाद महतो समाज का एक बड़ा नेता खो दिया है तो उसकी भरपाई के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक प्लान तैयार किया है जिससे उनकी पार्टी के ट्रिपल एम समीकरण पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़े. झारखण्ड में महतो समाज की जनसंख्या 14 प्रतिशत के करीब है. हेमंत सोरेन नहीं चाहेंगे कि एक बड़ा वोट बैंक उनकी पार्टी से फिसले. झामुमो सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डुमरी में जगरनाथ महतो के निधन से हुई खाली सीट पर उनकी पत्नी बेबी देवी को उपचुनाव में उतारा जा सकता है. जानकारी के अनुसार जगरनाथ महतो के पुत्र अखिलेश महतो की उम्र 25 वर्ष से कम है ऐसे में अभी वह चुनाव नहीं लड़ सकते.

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में चुनावी दृष्टिकोण से महतो समाज काफी प्रभावशाली है. इस प्रमंडल में आधे से ज्यादा विधानसभा और दो लोकसभा सीट पर जीत हार का फेसला महतो समाज करता है. टाइगर जगरनाथ महतो की महतो समाज पर जबरदस्त पकड़ थी. इस बात को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भली भांति जानते थे. वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को बहुमत मिलने के बाद यह कयास लगाया जा रहा था कि मंत्रिमंडल में महतो समाज से मथुरा महतो को जगह दी जायेगी. लेकिन हेमंत सोरेन ने सभी कयासों पर विराम लगाते हुए जगरनाथ महतो को मंत्रिमंडल में शामिल किया था. वजह साफ़ थी कि जगरनाथ महतो का महतो समाज में अन्य नेताओं से ज्यादा पेठ थी.

जगरनाथ महतो के अंतिम संस्कार में उमड़ी ऐतिहासिक भीड़ ने भी इस बात को साबित किया कि महतो वर्ग में टाइगर जगरनाथ की केसी पकड़ थी ओर महतो समुदाय उन्हें अपना कैसा नेता मानता था. जाहिर है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन टाइगर जगरनाथ महतो की लोकप्रियता को जाया नहीं जाने देंगे और उनके परिवार में से ही किसी को उनका राजनीतिक उत्तराधिकार सौंपेंगे. दिवंगत जगरनाथ महतो के पुत्र अखिलेश महतो उर्फ राजू अगर 25 साल के होते तो कोई दिक्कत ही नहीं थी उनकी चार पुत्रियां हैं जो ब्याही जा चुकी हैं. कुल मिलाकर उनकी जगह सिर्फ उनकी पत्नी ले सकती हैं.

शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के निधन के बाद झारखंड एक बार फिर उपचुनाव के मुहाने पर खड़ा हो गया है. इससे पहले पांच विधानसभा क्षेत्र दुमका, मधुपुर, बेरमो, गांडर और रामगढ़ में उपचुनाव हुआ है, दुमका और मधुपुर में झामुमो, बेरमो और मांडर में कांग्रेस अपनी-अपनी सीटें निकालने में सफल रही लेकिन रामगढ़ में कांग्रेस की सीट को महागठबंधन की ताकत नहीं रोक पाई. इस सीट पर आजसू ने वापसी की..

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