झारखंड में फर्जी फार्मेसी कॉलेजों का खुलासा

झारखंड में संचालित लगभग 153 फार्मेसी कॉलेजों में से 90 प्रतिशत कॉलेज फर्जी तरीके से काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन कॉलेजों के संचालन में अनियमितताएँ पाई गई हैं, जिससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन कॉलेजों को लेटर ऑफ कंसेंट या एनओसी जारी करने की अंतिम स्वीकृति विभागीय मंत्री के पास होती है। इसके बाद ही परीक्षा प्राधिकार अपनी अनुमति प्रदान करता है, जिससे फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया संबंधित कॉलेजों को नामांकन की अनुमति देती है।

जांच में सामने आए तथ्य

विभाग के उप सचिव रंजीत लोहरा की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने 70 फार्मेसी कॉलेजों की जांच की, जिसमें 34 कॉलेजों का लेटर ऑफ कंसेंट रद्द करने और 36 कॉलेजों को शोकॉज जारी करने की सिफारिश की गई है। यह कॉलेज मानदंडों को पूरा नहीं कर रहे हैं और सुधार की आवश्यकता है। स्पष्ट है कि ये सभी कॉलेज डिप्लोमा (डी फार्मा) इन फार्मेसी के हैं और नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। 2022 में स्वास्थ्य विभाग ने फार्मेसी काउंसिल को एनओसी लेने की अनिवार्यता तय की थी, लेकिन राज्य में संचालित किसी भी डी फार्मा कॉलेज ने एनओसी नहीं लिया।

एनओसी न लेने पर स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी

यह ध्यान देने योग्य है कि 2022 से पहले डी फार्मा के लिए लेटर ऑफ कंसेंट जारी किया जाता था। लेकिन अनियमितताओं की बढ़ती शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया। 15 अक्तूबर 2022 को इस संबंध में एक संकल्प जारी किया गया, जिसमें एनओसी की प्रक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है। इस प्रक्रिया में राज्यस्तरीय परीक्षण समिति का गठन किया गया है, जो अनुशंसा करेगी। पूर्व स्वास्थ्य सचिव अरुण सिंह के कार्यकाल में यह भी तय किया गया था कि 2022 से पहले निर्गत लेटर ऑफ कंसेंट वाले कॉलेजों को भी एनओसी लेना होगा।

मान्यता रद्द करने का निर्णय

जांच के परिणामस्वरूप 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम फार्मेसी शिक्षा के मानकों को बनाए रखने और विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। विभाग को अब इस मामले में सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि फर्जी कॉलेजों के संचालन पर रोक लग सके।