2012 के दारोगा लालजी यादव फांसी लगा दी जान

by Aaditya HridayAaditya Hriday
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6 जनवरी को पलामू एसपी ने उन्हें किया था सस्पेंड पिठोरियाऔर ठाकुगांव में भी की थी थानेदारी
रांची। पलामू जिले के नावा बाजर थाना के पूर्व थानेदार लालजी यादव थाना परिसर स्थित अपने कमरे में फंदे से झूल कर जान दे दी। लालजी यादव मूल रुप से साहेबगंज के पुरानी साहेबगंज के रहने वाले रामअयोध्या यादव के होनहार पुत्र माने जाते थे। लालजी यादव रांची में मार्च 18 से अगस्त 18 तक पिठोरिया के थानेदार थे, उसके बाद उन्होंने दिसंबंर 2018 से अक्तूबर 2019 तक बुड़मू में थानेदारी की। 28 अक्तूबर को उनका तबादला पलामू हो गया था,कुछ ही दिनों के बाद उन्हें रेहला की थानेदारी दी गयी, उसके बाद वहां से हटा कर टाउन थाना भेज दिया गया वहां से आठ महीना पहले ही उन्हें नावाबाजार का थानेदार बनया गया था। 6 जनवरी को उन्हें पलामू डीटीओ से बहस करने कि शिकायत पर पलामू एसपी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। जिससे वह काफी तनान में आ गये थे। 6जनवरी को ही वो बुड़मू मालखाना का चार्ज देने के लिए आये थे और कल सोमवार की दोपहर12.30 बजे वहां से 4.30 बजे पलामू पहुंचे थे।
जूनियर को थानेदार बनाने से थे तनाव में—
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक छह जनवरी को उन्हें सस्पेंड करने के बाद पलामू एसपी चंदन कुमार ने 2018 बैच के दारोगा दीपक दास को थाने की कमान सौंप दी। तब से लालजी यादव मानसिक तनाव में रह रहे थे। सीनियर आॅफिर होते हुए वो अपने जूनियर के अधीन काम करने की बात बर्दास्त नहीं कर सके। इसी कारण कल वो रांची के बुड़मू थाने के थानेदार मानव मयंक को मालखाने की जवाबदेही सौंपने के बाद बीती रात फांसी लगा कर हमेशा के लिए अपनी जिम्मेदारी से दूर चले गये।
विरोध में पलामू के लोग उतरे सड़क पर–
एसपी चंदन कुमार के खिलाफ की नारेबाजी—
नावाबाजार थाना के सस्पेंड थानेदार लालजी यादव की मौत की खबर पलमू में तेजी से फ ैल गयी, उसके बाद देखते ही देखते सैकड़ों लोग हादसे के खिलाफ एसपी चंदन कुमार को दोषी मानते हुए सड़क पर उतर गये। भीड़ में मौजूद लोग एसपी के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और सड़क जाम कर दिया।
डेढ़ लाख में से एक लाख ले लेते थे वरीयअधिकारी-
इस मामले में एक सीनियर दारोगा ने बताया कि नावा बाजार थाने में महीने में डेढ़ लाख रुपये की अवैध कमाई होती थी जिसमें से एक लाख रु वरीय अधिकारी ही ले लेते थे, बाकी पचास हजार रुपये से थाना चलाना पड़ता था।
इधर सीनियर दारोगाआेंं ने यह भी बताया कि जब से 18 बैच के दारोगा आये हैं, तब से उनके द्वारा थानेदारी के लिए डाक बोला जा रहा है, उन्हें काम का तजुर्बा नहीं होने के बावजूद पैसे के बल पर थानेदारी दे दी जा रही है। जबकी पहले नये दारोगा को पांच साल तक सीनियर के अंडर में काम सिखने के बाद थानेदार बनाया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि राज्य के कई जिलों के18 बैच के कई कुंवारे दारोगा तो तिलक में पैसे लेक र थानेदारी के लिए चढ़ावा दे रहे हैं। यही कारण है कि आज राज्य में 94 और 12 बैच कई आॅफिसर प्रताड़ना के शिकार हैं। एक सीनियर को जूनियर के अंडर में करने से उनमें हीन भावना पैदा हो रही है।
इधर जानकारी के मुताबिक पलामू पुलिस लालजी यादव द्वारा फांसी लगा कर जान देने के मामले को गंभीरता से लेते हुए पड़ताल शुरु कर दी है।

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