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एक नज़र में पूरी खबर
- पश्चिमी सिंहभूम जिले में लेबर कार्ड के नाम पर अवैध वसूली की शिकायत, जिसमें एक बिचौलिए ने पीड़िता से 1500 रुपये की मांग की और धमकी दी।
- डालसा की सहायता से 40 साल बाद एक पिता और बेटे का पुनर्मिलन हुआ, जिसमें वृद्ध मदन साहू को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
- प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और डालसा की टीम ने मदन साहू के परिवार को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भावुक पुनर्मिलन संभव हुआ।
पश्चिमी सिंहभूम में लेबर कार्ड के नाम पर अवैध वसूली का मामला
चाइबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में लेबर कार्ड (ई-श्रम कार्ड) के माध्यम से लाभ दिलाने के नाम पर अवैध वसूली की शिकायत सामने आई है। एक पीड़िता, सुप्रिया निषाद, जो बड़ा नीमडीह की निवासी हैं, ने उपायुक्त चंदन कुमार को इस संबंध में शिकायत दी है।
पीड़िता ने बताया कि 30 मार्च को उन्हें लेबर कार्ड के तहत सिलाई मशीन खरीदने के लिए 7000 रुपये प्राप्त हुए। इसके बाद, शोभा देवी नामक एक बिचौलिए ने उन्हें फोन करके परेशान करना शुरू कर दिया और 1500 रुपये की मांग की। जब उन्होंने पैसे देने से मना किया, तो उन्हें धमकी दी गई कि वह अधिकारियों से कहकर उनका लेबर कार्ड बंद करवा देगी। साथ ही, पीड़िता पर सरकारी पैसे के गबन का आरोप लगाकर जेल भेजने की भी धमकी दी गई। बिचौलिए ने कहा कि इस पैसे का कुछ हिस्सा अधिकारियों को भी देना होगा। इस प्रकार, कार्ड बनाते समय भी अवैध वसूली की गई थी।
उपायुक्त चंदन कुमार ने कहा है कि उन्हें इस मामले की शिकायत मिली है और इसकी जांच की जा रही है। यदि जांच में इस तरह की वसूली की पुष्टि होती है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
डालसा की सहायता से 40 साल बाद मिला बिछड़ा परिवार
चाइबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला के सदर अस्पताल में सोमवार को एक भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब 40 वर्षों के बाद एक पिता को उनका बेटा मिला। यह सफलता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद शाकिर और सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में अधिकार मित्रों द्वारा संभव हुई।
2 अप्रैल को मदन साहू नामक एक वृद्ध को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) से जुड़े पीएलवी प्रमिला पात्रो, रेणु देवी और सूरज कुमार ठाकुर ने न केवल उनका इलाज करवाया, बल्कि उनके परिवार को खोजने का भी प्रयास किया। वृद्ध की स्थिति इतनी गंभीर थी कि वे स्वयं की देखभाल भी नहीं कर पा रहे थे, लेकिन डालसा की टीम ने हर संभव प्रयास किया।
जांच के दौरान यह पता चला कि मदन साहू का मूल निवास ओडिशा है। 40 वर्ष पहले, उन्होंने अपनी पहली पत्नी को छोड़कर दूसरी शादी कर ली थी। जब उनकी पहली पत्नी का बेटा, कुनू साहू, चाइबासा पहुंचा, तो उसने अपने पिता को देखकर भावुक होकर लिपट गया। अपने पिता को देखकर उसने उन्हें भगवान मानते हुए अपने साथ घर ले जाने का निर्णय लिया।
इस प्रयास में विनीता सांडिल, उमर सिद्दीकी, रविकांत ठाकुर और संजय निषाद का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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