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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का बयान: भारत माता के चरणों में प्रणाम करना ‘तमिल विरोधी’ नहीं
चैन्नई। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने मंगलवार को रामेश्वरम में आयोजित एक कार्यक्रम में के दौरान भारत माता के प्रति श्रद्धा प्रकट करने को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि जो कोई भारत माता के चरणों में झुककर प्रणाम करता है, वह तमिल विरोधी नहीं होता। राधाकृष्णन ने काशी और तमिलनाडु के सांस्कृतिक संबंधों पर जोर देते हुए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विचार की महत्ता पर बल दिया।
श्री राधाकृष्णन का सांस्कृतिक संदेश
उन्होंने कहा कि हम रोजाना भारत माता के चरणों में झुकते हैं और आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं। क्या इससे हम तमिल विरोधी बन जाते हैं? उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया कि यदि राष्ट्र एक आंख है, तो मातृभाषा तमिल दूसरी आंख है, जिनका विभाजन नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री का समर्थन
उपराष्ट्रपति ने एक हालिया उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने तमिल समुदाय के साथ खड़े होने का एक प्रभावशाली कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि नट्टुकोट्टई चेट्टियारों ने राज्य सरकार के समर्थन से काशी में अपने विश्रामगृह की अतिक्रमित भूमि को मात्र 48 घंटे में वापस हासिल कर लिया। यह कदम प्रधानमंत्री की नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
काशी तमिल संगमम का आयोजन
शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिसंबर में वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगमम (केटीएस 4.0) का समापन समारोह रामेश्वरम में हुआ, जिसका मुख्य विषय ‘तमिल करकलम’ रखा गया था। इसका उद्देश्य उत्तर और दक्षिण भारत के बीच भाषाई आदान-प्रदान और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देना था।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का बयान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस अवसर पर कहा कि तमिल सभ्यता भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि तमिल भाषा सिर्फ तमिलनाडु में नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत में फैल चुकी है। उनके अनुसार, काशी तमिल संगम 4.0 इस संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राज्यपाल आर एन रवि का भाषण
तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि ने अपने भाषण को पूरी तरह से तमिल में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष लाखों छात्र भारत में तमिल सीख रहे हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश से 300 हिंदी भाषी छात्र भी शामिल हैं।
भाजपा अध्यक्ष का आभार
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कहा कि तमिल वासियों को प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश के छात्रों को तमिल सीखने का संदेश दिया है और यह भाषा हजारों वर्षों से जीवित है।
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