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भारतीय क्रिकेट में कुछ प्रतिभाएं ऐसी होती हैं जो अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्वता दिखाते हुए सबका ध्यान आकर्षित करती हैं। वैभव सूर्यवंशी भी ऐसी ही एक प्रतिभा हैं। मात्र 14 वर्ष की आयु में आईपीएल और अंडर-19 क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर चुके वैभव पर सभी की निगाहें हैं। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी कम उम्र में उनका जूनियर विश्व कप सफर समाप्त होता दिख रहा है। इसका कारण उनकी प्रतिभा नहीं, बल्कि कुछ नियम हैं।
अंडर-19 विश्व कप में वैभव की पहली बड़ी परीक्षाएँ
जिंबाब्वे और नामीबिया में शुरू हुए अंडर-19 विश्व कप में भारतीय टीम ने शानदार शुरुआत की। अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी से बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वे मात्र दो रन बनाकर आउट हो गए। हालांकि, एक मैच में प्रदर्शन से किसी खिलाड़ी को आंकना गलत है। टीम प्रबंधन और क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि आगामी मैचों में वैभव टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
क्यों नहीं खेल पाएंगे अगला जूनियर विश्व कप
हालांकि वैभव सूर्यवंशी की उम्र अगले अंडर-19 विश्व कप के दौरान नियमों के अनुसार अभी भी पात्रता में होगी, लेकिन वह टूर्नामेंट में भाग नहीं ले पाएंगे। इसके पीछे बीसीसीआई का एक नियम है, जो कहता है कि कोई खिलाड़ी केवल एक बार अंडर-19 विश्व कप खेल सकता है। इसके अलावा, घरेलू स्तर पर भी कोई खिलाड़ी दो से अधिक सीज़न तक जूनियर टीम का हिस्सा नहीं रह सकता।
बीसीसीआई के नियम के पीछे की सोच
बीसीसीआई ने यह निर्णय युवा टैलेंट को अधिक अवसर देने के उद्देश्य से लिया है। अंडर-19 विश्व कप हर दो साल में आयोजित होता है, और इस दौरान कई नए खिलाड़ी सामने आते हैं। यदि पुराने खिलाड़ियों को फिर से मौका दिया जाता है, तो नए और प्रासंगिक खिलाड़ियों के लिए अवसर सीमित हो जाते हैं। बोर्ड मानता है कि जो खिलाड़ी टिपण्णी के लायक है, वह एक ही विश्व कप में अपनी छाप छोड़ सकता है।
दो बार अंडर-19 विश्व कप खेलने वाले भारतीय खिलाड़ी
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई महान खिलाड़ी हैं, जिन्होंने दो बार अंडर-19 विश्व कप खेला है। इनमें रवींद्र जडेजा, मोहम्मद कैफ, सरफराज खान, आवेश खान, और अभिषेक शर्मा जैसे नाम शामिल हैं। हालाँकि, किसी भी भारतीय खिलाड़ी ने तीन बार इस टूर्नामेंट में भाग नहीं लिया है। समय के साथ-साथ चयन की नीतियाँ भी और अधिक कठोर होती गई हैं।
एक बार खेलकर ही बने सुपरस्टार
इतिहास यह सिखाता है कि महान बनने के लिए बार-बार जूनियर विश्व कप खेलना आवश्यक नहीं है। विराट कोहली, रोहित शर्मा, युवराज सिंह, और शिखर धवन जैसे खिलाड़ी केवल एक बार अंडर-19 विश्व कप खेलकर भारतीय क्रिकेट में बड़े सितारे बन गए। वैभव सूर्यवंशी के लिए भी यही सिद्धांत लागू होता है कि एक ही मंच उनके लिए पर्याप्त हो सकता है, बशर्ते प्रतिभा और मेहनत संग हों।
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