धनबाद का ‘पाताल लोक’: बाघमारा में अवैध कोयला तस्करी की कहानी

बाघमारा (धनबाद): झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र में अवैध खनन की एक भयावह स्थिति सामने आई है, जिसने अधिकारियों को चिंता में डाल दिया है। धनबाद जिले के बाघमारा क्षेत्र में जमुनिया नदी के किनारे कोयला तस्करों ने एक छुपी हुई दुनिया बना रखी है, जिसे स्थानीय लोग ‘पाताल लोक’ के नाम से जानते हैं।

बीसीसीएल और वन विभाग की भूमि पर कब्जा

जमुनिया नदी के आसपास का यह पहाड़ी क्षेत्र आधिकारिक रूप से बीसीसीएल (BCCL) और वन विभाग की संपत्ति माना जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि यहाँ तस्करों का राज चलता है। उन्होंने इस क्षेत्र में सैकड़ों गहरी सुरंगों का नेटवर्क बना रखा है, जिनमें बाइक और अन्य वाहन आसानी से चल सकते हैं।

कॉरपोरेट स्टाइल में अवैध संचालन

यहाँ अवैध खनन का संचालन एक व्यवस्थित कोल कंपनी के मॉडल पर किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यहाँ मजदूरों से दिन-रात तीन शिफ्टों में काम लिया जाता है।

  • जेनरेटर और बिजली: रात की शिफ्ट के लिए बड़े पैमाने पर जेनरेटर लगाए गए हैं, जिससे सुरंगों में रोशनी बनी रहती है।
  • बांस-बल्ली का सहारा: सुरंगों की छत को ढहने से बचाने के लिए तस्करों ने बांस और बल्लियों का उपयोग किया है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद असुरक्षित है।

खतरनाक कामकाजी स्थिति

इस ‘पाताल लोक’ में काम करने की स्थिति अत्यंत जोखिम भरी है। अक्सर सुरंगों का ढहना मजदूरों की जान ले लेता है। अब तक कई लोग इन अवैध खदानों में दब चुके हैं, लेकिन तस्करों के प्रभाव और डर के कारण ये मामले अक्सर अनसुने रह जाते हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया: हवाई सर्वे का निर्णय

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस और जिला प्रशासन ने इस मामले में सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन खतरनाक इलाकों का अब ड्रोन सर्वेक्षण किया जाएगा। इस सर्वेक्षण के माध्यम से अवैध सुरंगों की सटीक स्थिति का पता लगाया जाएगा। जल्द ही इन सुरंगों को जमींदोज करने के लिए एक बड़े अभियान की योजना बनाई जा रही है।