ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने का श्रेय लिया, कांग्रेस ने किया मजाक

by Ananya Singh
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भारत-पाकिस्तान तनाव पर दावा

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए तनाव को खत्म करने का दावा एक बार फिर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। ट्रंप के इस नए बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ज़ोरदार हमला किया है। कांग्रेस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रंप अब तक इस प्रकार का दावा 70 बार कर चुके हैं, जबकि भारत सरकार ने इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। वाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने दुनिया की आठ लंबी चल रही लड़ाइयों को समाप्त कराया है।

भारत-पाक के संदर्भ में ट्रंप का बयान

ट्रंप ने कहा, “भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे। मैंने देखा कि दोनों देश परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहे थे। यदि मैं हस्तक्षेप नहीं करता, तो करोड़ों निर्दोष लोग मारे जाते।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने 10 महीनों के दौरान कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया और इजरायल-ईरान जैसे आठ महत्वपूर्ण संघर्षों को सुलझाया है।

कांग्रेस का तीखा प्रतिरोध

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ट्रंप और मोदी की मित्रता पर तंज किया। उन्होंने लिखा, “हाल ही में यह संख्या 68 थी, लेकिन अब यह बढ़कर 70 हो गई है। प्रधानमंत्री के ‘अच्छे दोस्त’ ने यह फिर से दावा किया है कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के अचानक रूकने का श्रेय उन्हें मिलता है।”

नोबेल शांति पुरस्कार की आकांक्षा

अपने बयान में ट्रंप ने यह भी व्यक्त किया कि उन युद्धों को रुकवाने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकने से लगभग 1.5 से 2 करोड़ लोगों की जान बचाई गई है, जो उनके लिए किसी भी पुरस्कार से बड़ी बात है।

भारत सरकार का रुख

यह ध्यान देने योग्य है कि भारत सरकार ने हमेशा कहा है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। फिर भी, 10 मई 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता के फलस्वरूप दोनों देशों ने पूर्ण युद्धविराम पर सहमति जताई है। कांग्रेस का आरोप है कि ट्रंप के इस प्रकार के बार-बार दावे भारतीय संप्रभुता और प्रधानमंत्री के दावों पर सवाल खड़ा करते हैं।

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