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एक नज़र में पूरी खबर
- चैती छठ महापर्व का आयोजन सिमडेगा में आज से शुरू हुआ, जो चार दिवसीय कठिन उपवास है और सूर्य देव तथा छठी मैया की पूजा के लिए समर्पित है।
- उपायुक्त कंचन सिंह ने व्रत का अनुष्ठान करते हुए नहाय-खाय की परंपरा का पालन किया, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
- इस पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, और 36 घंटे का निर्जला उपवास तथा अर्घ्य अर्पित करने की प्रक्रिया शामिल है।
चैती छठ महापर्व का आयोजन सिमडेगा में शुरू
सिमडेगा: लोक आस्था का प्रमुख महापर्व चैती छठ आज से धूमधाम के साथ आरंभ हो गया है। यह चार दिवसीय कठिन उपवास सूर्य देव और छठी मैया के प्रति समर्पित होता है, जिसमें व्रती कठोर नियमों का पालन करते हुए प्रकृति की पूजा करते हैं। हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के बीच मनाया जाने वाला यह पर्व संतान की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से आयोजित किया जाता है।
उपायुक्त ने किया व्रत का अनुष्ठान
उपायुक्त कंचन सिंह ने आज स्वयं इस व्रत का अनुष्ठान आरंभ किया। उन्होंने गेहूं सुखाकर और सात्विक भोजन तैयार करके नहाय-खाय की परंपरा का पालन किया। जिले में हजारों श्रद्धालु इस महापर्व में भाग ले रहे हैं।
नहाय-खाय से होती है पर्व की शुरुआत
चैती छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती नदी, तालाब या पवित्र जल स्रोत में स्नान करके शुद्धि प्राप्त करते हैं। इसके बाद वे सात्विक भोजन का सेवन करते हैं, जिसमें मुख्य रूप से कद्दू, चना दाल और अरवा चावल का भात शामिल है। यह दिन शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
खरना पूजा और 36 घंटे का निर्जला उपवास
कल, यानी 23 मार्च को खरना पूजा का आयोजन होगा। इस दिन व्रती पूरे दिन निराहार रहेंगे और शाम को पूजा के बाद गुड़-दूध से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास प्रारंभ होगा, जो इस पर्व की सबसे चुनौतीपूर्ण साधना मानी जाती है।
अर्घ्य अर्पित करने की प्रक्रिया
24 मार्च को व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। सिमडेगा के केलाघाघ सूर्य मंदिर सरोवर तट सहित विभिन्न नदियों और तालाबों के किनारे विधि-विधान से पूजा का आयोजन किया जाएगा। वहीं, 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण होगा और इस महापर्व का समापन होगा।
आस्था और अनुशासन का प्रतीक
चैती छठ आस्था, शुद्धता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। जिले में घाटों की साफ-सफाई और अन्य तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उपायुक्त के नेतृत्व में प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय है।
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