आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा का घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन का सातवां दिन
रांची। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आहूत घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन का आज सातवां दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने अपने मान-सम्मान, पहचान, पेंशन व नियोजन के लिए दूसरी क्रांति करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्वी सिंहभूम के अध्यक्ष विश्वजीत प्रमाणिक ने कहा कि हमारे आंदोलनकारी झारखंड अलग राज्य के परम गौरव है। कार्यक्रम के दौरान मान-सम्मान दो, पहचान दे सरकार और आंदोलनकारी राज्य के जिंदा दस्तावेज के नारे लगा रहे थे। मौके पर आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के अध्यक्ष प्रेमचंद मुर्मू ने कहा कि झारखंड व आंदोलनकारियों के इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता है। आज राज्य हमारा जरूर बना है लेकिन शासन हमारा नहीं है। अधिकारी पदाधिकारी बाहर के लोग हावी हैं। विकास-कल्याण कार्यों में अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं। जिसके कारण झारखंड आंदोलनकारियों को समान रूप से मान सम्मान, पहचान, नियोजन व नियोजन की गारंटी सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। इसलिए हमे संघर्ष करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री इन बातों को गंभीरता से लें और झारखंड को झारखंड आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप गढ़ने का काम करें। झारखंड बेहतर राज्य बनने की सभी अहर्ता को पूर्ण करता है। संघर्ष मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष राजू महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने आज अपनी पहचान की लड़ाई लड़ने के लिए गोलबंद होकर घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी अपने संघर्ष के बल पर अपनी पहचान की लड़ाई स्थापित करके रहेंगे और शासन प्रशासन में बैठे लोगों को नींद से जगाने का काम करेंगे। प्रवक्ता पुष्कर महतो ने कहा कि आंदोलनकारी ही अब अबुआ राज बनाएंगे और उसे सजाने-संवारने का भी काम करेंगे। कार्यक्रम में शिवशंकर महतो, सर्जन हांसदा, अफरोज शाह, रसराज महतो, रामनाथ महतो, श्यामपद महतो, चैतू मुंडा, चितरंजन महतो, मनिंद्र सिंह, लव किशोर हांसदा, आदित्य महतो, दुर्योधन महतो, अमर गोप, नासिर अंसारी, सुभान मियां, विजय गोपाल तिवारी, खगन मिश्रा, मदन टूडू, धर्म चंद्र महतो, सुनील महतो, नीलकंठ मार्डी आदि शामिल थे।
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!