वीर चक्र विजेता शहीद जॉन ब्रिटो की मां बीमार, परिजन हलकान
राज्य सरकार को परवाह नहीं, स्थानीय विधायक ने नहीं की मदद
वेट्रन आर्गेनाइजेशन और नाइन बिहार रेजिमेंट की मदद से हो रहा इलाज
रांची । सिमडेगा के पिंडाटांगर निवासी वीर चक्र विजेता शहीद जॉन ब्रिटो किड़ो की मां गंभीर रूप से बीमार हैं। ब्रेन हेमरेज होने के बाद बेरनाडेट किड़ो को सिमडेगा से रांची लाकर पहले हेल्थ प्वाइंट हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया। वहां तीन दिन में लगभग 1.30 लाख रुपये खर्च हुए, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति चरमरा गयी। 90 वर्षीय पति कारलुस किड़ो और दैनिक मजदूर बेटे विपिन किड़ो की गुहार पर भी स्थानीय विधायक भूषण बाड़ा और राज्य सरकार से कोई मदद नहीं मिली।
जानकारी मिलने पर रिटायर फौजियों की संस्था वेट्रन आर्गेनाइजेशन आफ झारखंड के मुकेश कुमार और अशोक झा की पहल पर शहीद बेटे के रेजिमेंट नाइन बिहार रेजिमेंट के सीओ ने मदद की है, जिससे अब मेडिका हॉस्पिटल के आईसीयू में उनका इलाज चल रहा है। उनके पति कारलुस किड़ों को एक कमरे में ठहरने की व्यवस्था संस्था के अशोक झा ने संभाली है। इलाज संबंधी अन्य भारी खर्च के कारण पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार की कमर तोड़ दी है।
कभी राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने शहीद की मां को दिया था वीर चक्र

सिमडेगा के पिंडाटांगर के रहने वाले जॉन ब्रिटो किड़ो नाइन बिहार रेजिमेंट में सिपाही थे। 1989 में भारत सरकार ने उनके रेजिमेंट की तैनाती श्रीलंका के ओपी पवन में की थी। श्रीलंका में ही बहादुरी से लड़ते हुए जॉन ब्रिटो ने अपने जीवन की कुर्बानी दे दी। उनके वीरता का सम्मान करते हुए भारत सरकार ने उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया था। तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने शहीद की मां बेरनाडेट किड़ो को राष्ट्रपति भवन बुलाकर उनको वीर चक्र से सम्मानित किया था।
शहादत पर हुआ था गर्व आज आ रहे आंसू : पिता
बीमार पत्नी की तीमारदारी में लगे कारलुस कहते हैं कि जब बेटा शहीद हुआ था, तब उसके शव देखकर भी नहीं रोया। उसकी शहादत पर गर्व हुआ था। लेकिन, आज सिस्टम की बेरुखी ने रुला दिया। आखिर बेटे को मिले वीर चक्र मेडल का क्या फायदा?

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