अभिभावकों और छात्रों की शिकायत पर उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग गंभीर
रांची। नीजी विश्वविद्यालय द्वारा गलत सूचना देकर छात्रों का एडमिशन लेने की शिकायत को उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। अब विभाग ने सभी नीजी विश्वविद्यालयों की जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है। बहुत से अभिभावकोंं ने शिकायत की है कि झारखंड में चल रहे निजी विश्वविद्यालय गलत सूचना दे कर एडमिशन ले रहे हैं। वहीं यूजीसी के नियमानुसार विश्वविद्यालय अपने वेबसाइट पर नामांकन से जुड़े विवरण भी साझा नहीं कर रहे हैं। जबकि यूजीसी का स्पष्ट निर्देश है कि शैक्षणिक संस्थान को अपने वेबसाइट पर कोर्स, कोर्स फीस, फैकल्टी, सीटों की संख्या जैसी सभी जानकारी देनी है। इसके बाद भी यूजीसी का निर्देशों का उल्लंधन कर निजी विश्वविद्यालयों के वेबसाइट पर पूरी जानकारी नहीं दे रहे है। ज्ञात हो कि दिसंबर महीने की 17 तारीख को राज्यपाल सह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति रमेश बैस ने निजी विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व प्रशासनिक गतिविधियों की समीक्षा बैठक की थी। इसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि यूजीसी की अनुमति के बिना निजी विश्वविद्यालय विभिन्न कोर्स शुरू कर विद्यार्थियों को डिग्री बांट रहे हैं। ऐसा कर वे सिर्फ विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने सभी निजी विश्वविद्यालयों को यूजीसी एवं सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा था। राज्यपाल की नाराजगी के बाद भी विवि निदेर्शों को गंभीरता से नहीं लिये। विभाग ने ऐसे विश्विद्यालयों को चिन्हित कर नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है।
राज्य में ये निजी विवि है संचालित
प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, राधा गोविंद यूनिवर्सिटी, आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी, रामचंद्र चंद्रवंशी यूनिवर्सिटी, साइंर्नाथ यूनिवर्सिटी, सरला बिरला यूनिवर्सिटी, इक्फाई यूनिवर्सिटी, उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी और वाइबीएन यूनिवर्सिटी आईसेक्ट यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी, अरका जैन यूनिवर्सिटी, कैपिटल यूनिवर्सिटी, झारखंड राय यूनिवर्सिटी, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी, शामिल थे।
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!