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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
नगर परिषद चुनाव की तैयारी में पाकुड़ का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया है। गलियों से चौक-चौराहों तक चर्चा का विषय ये है कि इस बार शहर का नया चेहरा कौन बनेगा। मुकाबला इस बार खास इसलिए भी है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। सभी पार्टी अपने-अपने पक्ष में जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं।
चुनावी दंगल में बड़े उम्मीदवारों की टक्कर
इस चुनाव में स्थिति साफ नहीं है। हर वार्ड में कांटेदार मुकाबला है। भाजपा के उम्मीदवार पिछले विकास कार्यों की चर्चा कर रहे हैं, जबकि झामुमो और कांग्रेस के उम्मीदवार बदलाव और नई सोच के वादे कर रहे हैं। चाय की दुकानों और पार्कों में बस यही बहस गर्म है – “कौन जीतेगा?”
हाथ जोड़कर घर-घर जाकर समर्थन मांगना
प्रत्याशी सुबह से टोली बनाकर जनसंपर्क में जुटे हैं। कोई बाइक रैली कर रहा है तो कोई पैदल जनसंपर्क के लिए निकलता है। सभी घर-घर जाकर हाथ जोड़कर एक ही बात कह रहे हैं, “एक मौका दे दीजिए, इस बार बदलाव नजर आएगा।” कई जगहों पर महिलाएं सवाल पूछ रही हैं, जैसे “पानी कब आएगा? सड़क कब बनेगी?” जबकि युवा रोजगार और खेल के मैदानों की मांग कर रहे हैं।
नुक्कड़ सभा और रोड शो से शक्ति का प्रदर्शन
शाम होते ही शहर के विभिन्न इलाकों में नुक्कड़ सभाएं शुरू हो जाती हैं। चुनावी भाषणों की गूंज माइक पर सुनाई देती है। कहीं ढोल-नगाड़ों के साथ रोड शो निकाले जा रहे हैं और कहीं आंकड़ों से भरी भीड़ अपने समर्थन का प्रदर्शन कर रही है। सोशल मीडिया पर भी प्रचार-प्रसार जोरों पर है, वीडियो, पोस्टर और लाइव संबोधन के जरिए माहौल गर्म किया गया है।
बड़े मुद्दे इस बार के चुनाव में
मतदाताओं की सोच स्पष्ट है – उन्हें सिर्फ वादे नहीं, बल्कि ठोस कार्य चाहिए। इस बार के चुनाव में ये मुद्दे प्रमुखता से उभर रहे हैं:
- टूटी सड़कें और जलजमाव
- नियमित पानी की आपूर्ति
- बिजली की कटौती
- स्वच्छता व्यवस्था
- युवाओं के लिए रोजगार
लोग स्पष्ट रूप से कह रहे हैं, “जो काम करेगा, उसी को वोट मिलेगा।”
जनता के मूड की वजह से निर्वाचन की स्थिति
खुदरा बाजार में खरीदारी कर रही एक महिला ने कहा, “पिछली बार बहुत वादे हुए थे, अब कार्यों की आवश्यकता है।” एक युवक ने कहा, “चुनाव के समय नेता ही नजर आते हैं, इस बार हम सोच-समझकर वोट देंगे।” कुल मिलाकर, जनता इस बार अधिक सतर्क और सजग दिखाई दे रही है। लोग उम्मीदवार की छवि, व्यवहार और पिछले कार्यों को ध्यान में रखकर विचार कर रहे हैं।
अब चुनावी दिन की प्रतीक्षा
चुनावी हलचल अपने चरम पर है। हर पार्टी को अपनी जीत का भरोसा है, लेकिन असली निर्णय तो जनता के हाथ में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नगर परिषद की कुर्सी पर किसका कब्जा होता है और जनता किस पर अपना भरोसा जताती है।
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