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एक नज़र में पूरी खबर
- धनबाद रेल मंडल में मेयर संजीव सिंह और विधायक ढुल्लू महतो के बीच राजनीतिक टकराव से स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है।
- एक सरकारी कार्यक्रम में मेयर का आमंत्रण रद्द कर दिया गया, जिससे प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ और विवाद उत्पन्न हुआ।
- रेल मंत्रालय मामले को गंभीरता से ले रहा है, और अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना है।
धनबाद रेल मंडल में सियासी घमासान: मेयर संजीव सिंह और विधायक ढुल्लू महतो के बीच टकराव
धनबाद: कोयलांचल की राजनीति में मेयर संजीव सिंह और भाजपा विधायक ढुल्लू महतो के बीच चल रही अदावत अब रेलवे के दफ्तरों तक पहुँच गई है। इस समय धनबाद रेल मंडल के अधिकारियों के लिए स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई है। हाल ही में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मेयर संजीव सिंह और विधायक रागिनी सिंह का कथित अपमान एक बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है, जिसकी गूंज केंद्रीय रेल मंत्री तक पहुँच चुकी है।
विवाद का प्रारंभ
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक आधिकारिक कार्यक्रम में मेयर संजीव सिंह को आमंत्रित किया गया। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने के कुछ घंटे पहले उनके आमंत्रण को रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही, कार्यक्रम स्थल पर लगे बैनरों से भी उनके और विधायक रागिनी सिंह के नाम हटा दिए गए।
ढुल्लू महतो का दबाव
इस घटना के पीछे कहा जा रहा है कि यह सब ढुल्लू महतो के दबाव में किया गया, जो ‘चिल्लाने वाले नेता’ के रूप में जाने जाते हैं। इस मामले को लेकर रेल अधिकारियों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया और जनप्रतिनिधियों का अपमान किया।
संजीव सिंह का कड़ा बयान
इस विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार को रेल अधिकारियों की एक टीम ‘सिंह मेंशन’ पहुँची और मेयर तथा विधायक से माफी मांगी। लेकिन संजीव सिंह ने अधिकारियों से कहा, “शायद मेरे कार्यक्रम में आने से किसी का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, इसलिए मेरा नाम हटाया गया।”
समर्थकों की नाराजगी
इस घटना के बाद भाजपा समर्थकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। संजीव सिंह के समर्थकों ने रेल मंडल के अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए DRM का पुतला दहन किया। उनका कहना है कि यदि आज एक मेयर और विधायक के साथ ऐसा व्यवहार किया जा सकता है, तो भविष्य में अन्य जनप्रतिनिधियों की गरिमा का क्या होगा?
अधिकारियों पर गाज गिरने की संभावना
सूत्रों के अनुसार, रेल मंत्रालय इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। चूंकि रेल मंत्री और विधायक दोनों एक ही राजनीतिक दल (भाजपा) से हैं, ऐसे में रेल अधिकारियों की स्थिति कठिन हो सकती है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि प्रोटोकॉल की इस बड़ी चूक के लिए कुछ छोटे अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जबकि जांच की आंच उच्च अधिकारियों तक भी पहुँच सकती है।
मुख्य बिंदु
- प्रोटोकॉल का उल्लंघन: आमंत्रण देकर अंत में नाम हटाना।
- सियासी दबाव: ढुल्लू महतो और संजीव सिंह की अदावत का सरकारी कार्यक्रमों पर असर।
- माफी का प्रयास: रेलवे अधिकारियों ने लिखित या मौखिक माफी मांगी।
- मंत्री का हस्तक्षेप: विधायक रागिनी सिंह ने मामले को दिल्ली तक पहुँचाया।
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