नीम करोली बाबा: ‘कलियुग के हनुमान’ का नामकरण और कैंची धाम के चमत्कार की कहानी

by Aaditya HridayAaditya Hriday
Neem Karoli Baba: 'कलियुग के हनुमान' का कैसे नाम पड़ा 'नीम करोली बाबा', जानें कैंची धाम बाबा के चमत्कार की कहानी | film based on Neem Karoli Baba know the story of How did he get the name

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

नीम करोली बाबा: एक नई फिल्म की तैयारी

नीम करोली बाबा, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से महाराज जी के नाम से जानते हैं, भारतीय संत के जीवन पर आधारित एक नई फिल्म जल्द ही रिलीज होने वाली है। इस फिल्म का शीर्षक है ‘श्री बाबा नीब करोली महाराज’, जिसका निर्देशन शरद सिंह ठाकुर कर रहे हैं। इस कॉस्ट में सुभोद भावे, हितेन तेजवानी, मोहित गुप्ता जैसे कई प्रसिद्ध चेहरे दिखेंगे।

हेमैन तेजवानी इस फिल्म का हिस्सा हैं लेकिन वे नीम करोली बाबा का किरदार नहीं निभाएंगे। बलराम गर्ग और बलवीर सिंह के द्वारा निर्मित यह फिल्म बाबा की असाधारण जीवन कथा और उनके शिक्षाओं को जीवंत करेगी, जिससे उनकी महानता भारतीय आध्यात्मिक इतिहास में दर्ज की जाएगी।

नीम करोली बाबा का इतिहास

नीम करोली बाबा, जिनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था, उत्तर प्रदेश के नीब करोली गांव में एक अद्भुत घटना के बाद प्रसिद्ध हुए। जब वे युवा साधु थे, भूख के कारण उन्हें एक ट्रेन में चढ़ना पड़ा। बिना टिकट के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में बैठे होने के कारण टीटीई ने उन्हें बाहर जाने के लिए कहा। जब वे ट्रेन से उतर गए उसके बाद ड्राइवर ने इंजन को चालू करने का प्रयास किया, तब वह नहीं चला, जिससे यात्रियों और अधिकारियों दोनों में हैरानी फैल गई।

महाराज जी की आध्यात्मिक पहचान के बारे में जानते हुए एक स्थानीय मजिस्ट्रेट ने सुझाव दिया कि ट्रेन तभी चलेगी जब महाराज जी वापस लौटें। इसके बाद अधिकारी उनके पास खाने-पीने का सामान लेकर आए और उन्हें ट्रेन में चढ़ने का अनुरोध किया। उन्होंने केवल इस शर्त पर माना कि नीम करोली में एक रेलवे स्टेशन का निर्माण होगा और साधुओं का सम्मान बढ़ाया जाएगा। इस वादे को पूरा करने के बाद, उन्होंने ट्रेन में फिर से चढ़ने का निर्णय लिया और उनकी कृपा से ट्रेन आगे बढ़ी। इसी चमत्कार के कारण उनका नाम नीम करोली बाबा के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

साधु का जीवन और शिक्षाएं

नीम करोली बाबा, जो हिमालयी वंश के संत थे, ने 1973 में इस संसार को छोड़ दिया। उनकी शिक्षाएं सरल और सार्वभौमिक थीं, जैसे कि ‘सब एक है।’ उन्होंने अनुयायियों को प्रेम, सेवा, और सत्य बोलने की प्रेरणा दी। हनुमान जी के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा थी, और वे व्यक्तिगत मार्गदर्शक के रूप में ज्ञान प्रदान करते थे, जो भक्ति के मार्ग को दर्शाता है।

Have any thoughts?

Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!

Your Opinion on this News...

You may also like

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More