Table of Contents
📌 गांडीव लाइव डेस्क:
लांजी जंगल आईईडी ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा
लांजी जंगल आईईडी ब्लास्ट मामले में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में फरार चल रहे भाकपा (माओवादी) संगठन के सहयोगी को केरल के इडुक्की जिले से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति का नाम सावन टुटी उर्फ सबन टुटी है, जो सरायकेला-खरसावां जिले का निवासी है।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया
एनआईए की टीम ने केरल पुलिस के सहयोग से मुन्नार क्षेत्र में छापेमारी कर सावन टुटी को पकड़ लिया। यह व्यक्ति पिछले कुछ समय से वहीं पर छिपा हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जो उसकी पहचान और माओवादी संगठन से उसके संबंध की पुष्टि करते हैं।
कानूनी कार्रवाई
सावन टुटी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी था और उसकी गिरफ्तारी पर 20 हजार रुपये का इनाम भी रखा गया था। एनआईए ने इस मामले में उसे सितंबर 2021 में दाखिल चार्जशीट में नामित किया था। गिरफ्तारी के बाद, उसे भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम (CLA Act) के तहत विभिन्न गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ेगा।
आईईडी ब्लास्ट का विवरण
यह मामला मार्च 2021 में पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के लांजी जंगल हिल में हुए आईईडी ब्लास्ट से जुड़ा हुआ है। इस धमाके में तीन झारखंड जगुआर के जवान शहीद हो गए थे, जबकि तीन अन्य सुरक्षाकर्मी, जिनमें सीआरपीएफ के एक एएसआई/आरओ भी शामिल थे, गंभीर रूप से घायल हुए थे। एनआईए की जांच में निष्कर्ष निकला है कि सावन टुटी एक सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में माओवादी संगठन के लिए कार्यरत था और उस पर हमलों की योजना बनाने का आरोप है।
आगे की कार्रवाई
एनआईए ने इस मामले में अन्य आरोपियों और साजिशकर्ताओं की तलाश लगातार जारी रखी है और सक्रिय रूप से छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। यह गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले में गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है और वे संगठन के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए तत्पर हैं।
इस महत्वपूर्ण गिरफ्तारी से यह स्पष्ट होता है कि झारखंड में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल लगातार प्रयासरत हैं।
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!