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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
Dussehra 2025: राम को विजय वानर सेना के सहयोग से मिली. बच्चों को बताएं कि जीवन में अच्छे दोस्त और सही संगति का होना जरूरी है.
रामायण-रामलीला के पाठ: बचपन से हम सभी सुनते आ रहे हैं कि बच्चों का मन एक कच्ची मिट्टी जैसा होता है, जिसे किसी भी आकार में ढाला जा सकता है। हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनके बच्चे बड़े होकर समाज के लिए वरदान बनें, न कि श्राप। इसलिए, वे हमेशा यह कोशिश करते हैं कि अपने बच्चों को सही शिक्षा और संस्कार दें।
हर बच्चे को यह पता है कि दशहरा केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व नहीं है। इसके पीछे की पौराणिक कथा बच्चों में अच्छे संस्कार डालने का एक प्रभावी साधन है। आजकल समाज में जो बुराई फैली हुई है, उसे देखकर हर माता-पिता चिंतित रहते हैं कि कहीं वे अपने बच्चों की परवरिश में कोई गलती न कर दें।
राम, लक्ष्मण और सीता
आज के बच्चे कई बार गलत रास्ता पकड़ लेते हैं। इस अवसर पर बच्चों को रामलीला दिखाएं और घर पर रामायण की कथा सुनाएं। इससे उनके जीवन का दृष्टिकोण बदल सकता है। हर पात्र से बच्चे कुछ ना कुछ सीखेंगे। कहानी सुनाना बच्चों को हमेशा पसंद आता है, जिससे वे जल्दी प्रभावित होते हैं। भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जैसे आदर्श उनके व्यक्तित्व को और मजबूत बना सकते हैं।
रामलीला देखने और रामायण पढ़ने के फायदे
रामलीला देखने और रामायण पढ़ने से बच्चों को कई महत्वपूर्ण सीखें मिलती हैं। यह बताता है कि कठिनाइयों का सामना धैर्य, त्याग, आदर और सच्चाई के साथ करना चाहिए। माता-पिता अगर बच्चों को राम, लक्ष्मण, सीता और भरत जैसे पात्रों की कहानियों से अवगत कराते हैं, तो निश्चित रूप से उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव आएगा।
क्या सीख मिलती है?
- राम कितने बड़े राजा थे, फिर भी उन्होंने जीवन की कठिनाइयों का सामना किया। बच्चों को यह सिखाएं कि समस्याओं से भागना नहीं, बल्कि उनका साहस के साथ सामना करना चाहिए।
- राम, लक्ष्मण और भरत ने रिश्तों को सत्ता से ऊपर रखा। यह बच्चों को रिश्तों की महत्वता को समझाने का सर्वोत्तम उदाहरण है।
- कैकेयी जैसी गलत संगत ने पूरे राजपरिवार को दुख में डाल दिया। बच्चों को सिखाएं कि नकारात्मक व्यक्तियों से दूर रहना चाहिए।
- रावण, विद्वान होते हुए भी अहंकार के कारण नष्ट हुआ। बच्चों को समझाएं कि घमंड एक इंसान के सभी गुणों पर भारी पड़ सकता है।
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