Table of Contents
📌 मुख्य बिंदु:
- केंद्र सरकार ने बदला अपना पुराना फैसला
- अब झारखंड को मिलेगा 80% चावल और 20% गेहूं
- अप्रैल 2025 से लागू हुआ नया फूड सप्लाई अनुपात
- चावल के प्रति आदिवासी समुदाय की पसंद को मिला सम्मान
🍚 राशन कार्ड धारियों को अब ज्यादा चावल मिलेगा
झारखंड के लाखों राशन कार्ड धारियों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत खाद्यान्न आपूर्ति के पुराने फैसले में बदलाव करते हुए 80:20 के अनुपात में चावल और गेहूं देने की मंजूरी दे दी है।
🏛️ केंद्र सरकार ने पहले क्यों किया था बदलाव?
पहले केंद्र सरकार ने झारखंड को 68:32 के अनुपात में चावल और गेहूं देने का निर्णय लिया था। इस फैसले से झारखंड सरकार असहमत थी क्योंकि राज्य में चावल की खपत कहीं अधिक है, विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में।
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📨 झारखंड सरकार ने भेजा था विरोध पत्र
राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि झारखंड की जनता, खासकर एसटी समुदाय, चावल को प्राथमिकता देता है। झारखंड में गेहूं की खेती और खपत दोनों ही कम हैं। वहीं, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में गेहूं की मांग अधिक रहती है।
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✅ अप्रैल 2025 से लागू हुआ नया अनुपात – क्या है इसका मतलब?
अब 80:20 के अनुपात के अनुसार झारखंड को यदि 100 किलो अनाज आवंटित किया जाता है, तो उसमें 80 किलो चावल और 20 किलो गेहूं शामिल होंगे।
जनवितरण प्रणाली की दुकानों से इसी नियम के तहत खाद्यान्न का वितरण शुरू कर दिया गया है।
🔄 पहले भी हो चुका है चावल बनाम गेहूं पर विवाद
यह कोई पहली बार नहीं है जब चावल और गेहूं को लेकर झारखंड और केंद्र के बीच विवाद हुआ हो। स्थानीय जनजातीय संस्कृति, खानपान और कृषि स्थिति को देखते हुए राज्य में चावल हमेशा से पहली पसंद रहा है।
📢 आपके लिए क्या बदलेगा?
- अब राशन कार्ड धारियों को उनकी पसंद के अनुसार अधिक चावल मिलेगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाभुकों को विशेष राहत मिलेगी।
- आदिवासी समुदाय की पारंपरिक खाद्य आदतों का होगा सम्मान।
📌 निष्कर्ष
झारखंड सरकार की पहल और जनता की ज़रूरतों को समझते हुए, केंद्र सरकार का यह संशोधित फैसला लाखों राशन कार्ड धारियों के हित में है। इससे पोषण, स्वास्थ्य, और संतुलित वितरण में सुधार आएगा।
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