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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
रांची : झारखंड में नगर निकाय चुनावों के दौरान राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी का कहना है कि चुनावों के परिणाम के बाद राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। उनके अनुसार, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) संभवतः भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन कर सरकार बना सकता है। त्रिपाठी ने यह जानकारी एक संवाददाता से साझा की, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे सूत्र हैं जो जेएमएम और भाजपा के बीच समझौते की पुष्टि करते हैं।
15–20 दिनों में नए समीकरण स्पष्ट होंगे 🔍
केएन त्रिपाठी ने दावा किया है कि नगर निकाय चुनावों के संपन्न होने के 15 से 20 दिन के भीतर यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य की राजनीतिक स्थिति में क्या बदलाव आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सहमति इस संबंध में मिल चुकी है और प्रक्रिया लगभग अंतिम रूप में है। हालांकि, इस दावे पर जेएमएम या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जेएमएम के ऐतिहासिक गठबंधनों का उल्लेख 📜
पूर्व मंत्री त्रिपाठी ने कहा कि जेएमएम का भाजपा के साथ पहले भी संबंध रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि जेएमएम ने अतीत में अर्जुन मुंडा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, लेकिन बाद में कांग्रेस से जुड़े और फिर राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार गठबंधन बदल लिया। उनका आरोप है कि जेएमएम हमेशा अपनी राजनीतिक मजबूती के हिसाब से गठबंधन बनाती और उससे अलग होती रही है।
मेदिनीनगर चुनाव को लेकर बढ़ती नाराजगी 😠
राजनीतिक बयानबाजी के पीछे स्थानीय चुनावी समीकरणों की चल रही चर्चा भी एक कारण मानी जा रही है। केएन त्रिपाठी पहले डालटनगंज के विधायक रह चुके हैं। इस बार उनकी बेटी नम्रता त्रिपाठी मेदिनीनगर नगर निगम के मेयर पद की उम्मीदवार हैं। वहीं, जेएमएम ने मेयर पद के लिए पूनम सिंह को समर्थन दिया है, जिससे त्रिपाठी जेएमएम के प्रति नाराज दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल के दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार की कार्यशैली पर प्रश्न उठाए हैं।
चुनाव दलीय आधार पर नहीं, पर प्रचार जारी है 🗳️
नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहे हैं, लेकिन सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे हैं। मेदिनी नगर निगम के चुनाव में भाजपा ने अरुणा शंकर का समर्थन किया है और पार्टी के नेता उनके लिए प्रचार में जुटे हैं।
इस समय राज्य की राजनीति काफी अटकलों भरी है। अब सबकी निगाहें नगर निकाय चुनाव के परिणामों और उसके बाद होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ये बयान केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं या वास्तव में झारखंड की राजनीति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव आने वाला है।
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