झारखंड: गिरिडीह में लिथियम के भंडार की संभावना
गिरिडीह (तिसरी): झारखंड की खनिज संपदा में एक और महत्वपूर्ण तत्व जुड़ने की संभावना सामने आई है। तिसरी प्रखंड के असुरहड्डी और डूबा जंगलों में ‘सफेद सोना’ यानी लिथियम के बड़े भंडार के संकेत मिले हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने इस क्षेत्र में अपने सर्वेक्षण और ड्रिलिंग कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
सघन सर्वेक्षण का कार्य
जानकारी के अनुसार, GSI की टीम पिछले लगभग एक वर्ष से इस क्षेत्र में लिथियम की खोज में लगी हुई थी। टीम ने विभिन्न जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक मशीनों के माध्यम से ड्रिलिंग कर मिट्टी और पत्थरों के नमूने एकत्रित किए। सर्वेक्षण पूर्ण होने के बाद, GSI ने उन सभी स्थलों को चिन्हित करके सील कर दिया है जहां ड्रिलिंग की गई थी।
लिथियम भंडार की संभावनाएँ
ड्रिलिंग पॉइंट्स की मार्किंग और सीलिंग के बाद अब स्थानीय विशेषज्ञों और समुदाय के बीच लिथियम भंडार मिलने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इसकी मात्रा और गुणवत्ता के संबंध में GSI द्वारा कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। विभाग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस क्षेत्र में व्यावसायिक स्तर पर खनन कार्य कब शुरू होगा।
खनिज माफियाओं की गतिविधियाँ
असुरहड्डी की पहाड़ियों में पहले भी अवैध खनन की गतिविधियाँ सामने आई हैं। लगभग एक वर्ष पूर्व, यहाँ पत्थर माफियाओं द्वारा अवैध उत्खनन की खबरें आई थीं। कहा जाता है कि इस क्षेत्र से पुखराज, गोमेद और त्रिमुल्ली जैसे कीमती पत्थरों की तस्करी की जा रही थी। अब लिथियम की संभावनाओं ने इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है।
भारत के लिए लिथियम का महत्व
लिथियम को भविष्य का ईंधन माना जाता है। इसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी, स्मार्टफोन और सौर ऊर्जा संग्रहण बैटरियों में अनिवार्य है। यदि गिरिडीह में लिथियम के भंडार की पुष्टि होती है, तो यह झारखंड और भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
मुख्य बिंदु
- क्षेत्र: तिसरी प्रखंड, गिरिडीह (असुरहड्डी और डूबा जंगल)
- एजेंसी: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा ड्रिलिंग कार्य संपन्न
- वर्तमान स्थिति: ड्रिलिंग पॉइंट्स सील किए गए, रिपोर्ट का इंतज़ार
- महत्व: EV उद्योग और बैटरी निर्माण के लिए लिथियम की आवश्यकता

