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एक नज़र में पूरी खबर
- झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के ओम्बुड्समैन द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
- शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जेएससीए ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा लागू किए गए लोढ़ा समिति के दिशा-निर्देशों का सही ढंग से पालन नहीं किया है।
- ओम्बुड्समैन ने जेएससीए को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है, जिससे संघ की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
जमशेदपुर : झारखंड में क्रिकेट प्रशासन को लेकर एक नया विवाद उत्पन्न हुआ है। झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के ओम्बुड्समैन ने जेएससीए को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
शिकायत के बाद उठे विवाद के कारण
यह पूरा मामला जेएससीए के एक सदस्य द्वारा की गई शिकायत के कारण प्रकाश में आया। इस शिकायत में संघ की चुनाव प्रक्रिया और नियमों के अनुपालन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विशेष रूप से, यह आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लागू किए गए लोढ़ा समिति के दिशा-निर्देशों का पालन सही ढंग से नहीं किया गया।
संविधान में संशोधन पर सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जेएससीए ने अपने संविधान में आवश्यक संशोधन तो किए, लेकिन उसका विधिवत रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। इसके बावजूद वर्ष 2019, 2022 और 2025 में चुनाव कराए गए, जिससे इन चुनावों की वैधता पर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।
चुनावों की वैधता पर संकट का संकेत
यदि शिकायत के आरोप सही साबित होते हैं, तो पिछले तीन चुनावों को लेकर कानूनी पेच फंस सकता है। इससे न केवल वर्तमान पदाधिकारियों की स्थिति प्रभावित हो सकती है, बल्कि पूरे संघ की कार्यप्रणाली पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
फंडिंग में रुकावट की आशंका
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि अगर लोढ़ा समिति के नियमों का पालन नहीं किया गया, तो बीसीसीआई द्वारा मिलने वाली वित्तीय सहायता भी रोकी जा सकती है। यह स्थिति जेएससीए के लिए गंभीर आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न कर सकती है।
चार हफ्ते में जवाब देने का निर्देश
इस मामले में ओम्बुड्समैन न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण मिश्रा ने जेएससीए को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। अब सभी की नजरें जेएससीए के जवाब और आगे की संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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