मुंबई: अफगानिस्तान में तालिबान सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए पीनल कोड को लेकर वैश्विक स्तर पर आशंका और चिंता व्यक्त की जा रही है। इस संदर्भ में प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने तीव्र विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में तालिबान की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की।
सूत्रों के अनुसार, नए कानून में पत्नी को बिना हड्डी तोड़े मारने को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई पत्नी अपने माता-पिता के घर बिना पति की अनुमति के जाती है, तो उसे जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
जावेद अख्तर का तालिबान कानून पर बयान
जावेद अख्तर ने अपने एक पोस्ट में लिखा कि इस तरह के प्रावधान अत्यंत चिंताजनक हैं। उन्होंने भारत के धार्मिक नेताओं से अपील की कि वे इस कानून की बिना शर्त निंदा करें, क्योंकि यह सब धर्म के नाम पर किया जा रहा है। दूसरी ओर, उन्होंने तालिबान की नीतियों को विश्व का मैल बताते हुए कहा कि ऐसे कानून मानवता के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि किसी भी समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को वैध ठहराना गंभीर सामाजिक संकट की स्थिति पैदा करता है।
सामाजिक वर्ग के आधार पर सजा का प्रावधान
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह नया पीनल कोड समाज को विभिन्न वर्गों में विभाजित करता है। धार्मिक नेताओं को प्रमुखता दी गई है, जबकि आर्थिक और सामाजिक स्थिति के आधार पर सजा निर्धारित करने का प्रावधान है। उदाहरण के लिए, यदि कोई धार्मिक विद्वान अपराध करता है, तो उसे केवल चेतावनी या सलाह तक सीमित रखा जा सकता है। वहीं, निम्न वर्ग के लोगों के लिए सजा में जेल और शारीरिक दंड शामिल हो सकते हैं। इन प्रावधानों के चलते मानवाधिकार संगठनों में गंभीर चिंता का उत्सर्जन हुआ है।
मानवाधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, नए कोड में महिलाओं के खिलाफ शारीरिक या मानसिक हिंसा को स्पष्ट रूप से गैरकानूनी नहीं कहा गया है। यहां तक कि गंभीर अपराधों के मामलों में पति के लिए अधिकतम सजा भी बहुत कम निर्धारित की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कानून की प्रतियां देशभर के अदालतों में वितरित की गई हैं, हालांकि कई नागरिक इस पर खुलकर राय व्यक्त करने से डरते हैं। यह भी बताया गया है कि इस कोड पर सार्वजनिक चर्चा करना भी एक अपराध माना जा सकता है।
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