क्या भारत खेलों के महाकुंभ की मेजबानी के लिए तैयार है

by TejaswitaTejaswita Mani
img-fluid

भारत ने 2036 ओलंपिक की मेज़बानी के लिए दावेदारी पेश की

नई दिल्ली/अहमदाबाद। भारत ने औपचारिक रूप से वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेज़बानी के लिए अपनी दावेदारी को प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट जैसे सुधारों का उल्लेख करते हुए इस इरादे को स्थापित किया है। हालाँकि, इस यात्रा में कई चुनौतियाँ हैं, जैसे प्रशासनिक मुद्दे, आवश्यक बुनियादी ढाँचा और खिलाड़ियों का वैश्विक प्रदर्शन।

अहमदाबाद को मेज़बानी का मुख्य केंद्र

भारत ने गुजरात के अहमदाबाद को मुख्य केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें लगभग 4.1 अरब से 7.5 अरब डॉलर (लगभग 34,000 से 62,000 करोड़ रुपये) का आर्थिक निवेश होने की संभावना है। भारत को उम्मीद है कि 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन का अनुभव ओलंपिक की दावेदारी को मजबूती देगा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने कुछ मुख्य मुद्दों पर चिंता व्यक्त की है: भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) में प्रशासनिक कलह, डोपिंग का बढ़ता प्रचलन और भारत का पदक तालिका में पिछड़ना।

विशेषज्ञों की विचारधाराएँ

भारत की तैयारियों के विषय में खेल के जानकार दो अलग-अलग समूहों में बंटे हुए हैं। पूर्व टीम डॉक्टर पी.एस.एम. चंद्रन जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि डोपिंग और पर्यावरण प्रदूषण जैसे मुद्दों को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। उनका तर्क है कि अहमदाबाद की स्थिति दिल्ली की तुलना में बेहतर है। वहीं, अंजू बॉबी जॉर्ज जैसे प्रमुख एथलीटों का विश्वास है कि ‘नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल’ खेल संघों में पारदर्शिता लाएगा, जिससे भारत जर्मनी जैसे देशों को टक्कर दे सकेगा।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा की चुनौतियाँ

2036 के ओलंपिक की मेज़बानी की दौड़ में भारत के लिए अन्य देश, जैसे इंडोनेशिया, तुर्की, चिली, सऊदी अरब और कतर, पहले से कतार में खड़े हैं। खेल पत्रकार शारदा उग्रा का मानना है कि भारत को अपनी योग्यता साबित करने के लिए कई वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेज़बानी करनी चाहिए। उनके अनुसार, अहमदाबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) और बुनियादी ढाँचा अभी भी वैश्विक मानकों पर खरा उतरने के लिए सुधार की आवश्यकता है।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि 2036 में मेज़बानी में सफलता नहीं मिलती, तो 2040 का दशक भारत के लिए अधिक व्यावहारिक और परिपक्व हो सकता है। ओलंपिक की मेज़बानी केवल खेलों का आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और उभरती हुई आर्थिक ताकत का प्रदर्शन भी होगा। IOC का अंतिम निर्णय 2027 के अंत तक आने की संभावना है, तब तक भारत को प्रशासनिक ढांचे और डोपिंग मुक्त खेल संस्कृति पर काम करना होगा।

Have any thoughts?

Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!

Your Opinion on this News...

You may also like

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More