भारत ने म्यांमार स्थिति पर यूएन रिपोर्ट को अस्वीकार किया, पक्षपाती और संकीर्ण विश्लेषण बताया।

by VidyaVidya
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📌 गांडीव लाइव डेस्क:

भारत ने म्यांमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर जताई चिंता

भारत ने हाल ही में म्यांमार में मानवाधिकारों के मसले पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के संदर्भ में की गई ‘पक्षपातपूर्ण और संकीर्ण टिप्पणी’ की निन्दा की है। सरकार ने पड़ोसी देश में हो रही हिंसा को रोकने और समावेशी राजनीतिक संवाद को शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

कांग्रेस समिति की बैठक में भारत का स्टैंड

संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में मंगलवार को म्यांमार की स्थिति पर चर्चा आयोजित हुई। इस अवसर पर लोकसभा सांसद दिलीप सैकिया ने भारत का दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि भारत उन सभी पहलों का समर्थन करता है जो म्यांमार में शांति, स्थिरता और लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए वहां के लोगों और सरकार के नेतृत्व में चलती हैं।

हिंसा के खिलाफ भारत की अपील

सैकिया ने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि हिंसा का तत्काल अंत हो, राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए, मानवीय सहायता का स्वतंत्र रूप से वितरण किया जाए और समावेशी राजनीतिक संवाद को प्रारंभ किया जाए।” यह चर्चा म्यांमार में 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद बढ़ती हिंसा की पृष्ठभूमि में की गई थी।

भारत की स्थायी स्थिति

सैकिया, जो भाजपा सांसद दग्गुबाती पुरंदेश्वरी के नेतृत्व में एक बहुपरकीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, ने यह भी कहा कि भारत हमेशा जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देता है। ज्ञात हो कि उन्होंने यूएन की रिपोर्ट में भारत के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर अपनी गंभीर आपत्ति व्यक्त की।

भारत की यह स्थिति दर्शाती है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर मानवाधिकारों की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में प्रतिबद्ध है।

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