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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
भारत की भागीदारी से “जापद 2025” अभ्यास को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता खारिज
भारतीय विदेश मंत्रालय ने रूस में आयोजित बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास “जापद 2025” में भारत की भागीदारी पर पश्चिमी राष्ट्रों की चिंताओं को ठुकरा दिया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया कि इस अभ्यास में भारत के अलावा विभिन्न देशों ने भी सहभागिता की, जबकि अमेरिका, तुर्की और जर्मनी जैसे NATO सदस्य देशों ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया।
65 सदस्यीय भारतीय दल का योगदान
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय सशस्त्र बलों का एक 65 सदस्यीय दल रूस के निजनी क्षेत्र स्थित मुलिनो ट्रेनिंग ग्राउंड में इस अभ्यास में भाग लेने के लिए रवाना हुआ। यह अभ्यास सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने, सहक्रियता को सुधारने और विभिन्न सेनाओं के बीच युद्ध कौशल और तकनीक के आदान-प्रदान के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
NATO देशों की पर्यवेक्षक भूमिका 🌍
जायसवाल ने बताया कि कई अन्य देशों ने भी पर्यवेक्षक के रूप में इस अभ्यास में भागीदारी की। इन देशों में NATO सदस्य अमेरिका, तुर्की और हंगरी शामिल हैं। रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, बेलारूस रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस अभ्यास में कुल 23 देशों के पर्यवेक्षक शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से अमेरिका, तुर्की और जर्मनी शामिल थे। इसके अतिरिक्त, कई अंतरराष्ट्रीय संगठन जैसे यूनियन स्टेट, कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (CSTO) और कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (CIS) ने भी अपने पर्यवेक्षक भेजे।
EU की चिंताओं का भारतीय विदेश मंत्रालय का जवाब
हाल ही में, यूरोपीय संघ की उपाध्यक्ष काया कैलास ने कहा था कि रूस के साथ भारत के सैन्य अभ्यास और तेल खरीद, EU-भारत संबंधों में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। इस पर MEA प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत की स्थिति पहले से निर्धारित है। उन्होंने कहा, “हमारे रक्षा संबंध और सैन्य अभ्यास विभिन्न देशों के साथ होते हैं। तेल खरीद के मामलों में भी हमने अपनी नीति स्पष्ट की है।”
नई रणनीतिक EU-India साझेदारी का एजेंडा 📈
भारत और यूरोपीय संघ ने हाल ही में नई रणनीतिक साझेदारी की योजना को साझा किया है। प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच 17 सितम्बर को हुई बातचीत में इस पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने आपसी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
यूरोपीय आयोग और उच्च प्रतिनिधि ने “न्यू स्ट्रैटेजिक EU-India एजेंडा” पेश किया है, जिसका उद्देश्य पारस्परिक समृद्धि, सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस एजेंडे पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम है। दोनों पक्ष वर्तमान में संतुलित और महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा कर रहे हैं तथा सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर कार्यरत हैं।
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