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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
टुसु मेले में झारखंडी संस्कृति का जश्न 🎉
झारखंड वासी एकता मंच द्वारा आयोजित टुसु मेले में, बिष्टुपुर के गोपाल मैदान में स्थानीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस मेले में दूर-दराज से आए लोगों ने विशाल टुसु प्रतिमाओं एवं रंग-बिरंगी चौड़ल के साथ उत्सव की रौनक बढ़ाई। झुमुर सम्राट संतोष महतो के गीतों ने माहौल को झुमराते हुए बना दिया, जहां दर्शक और अतिथि एक साथ इस सांस्कृतिक धरोहर का आनंद लेते नजर आए।
संतोष महतो के गीतों ने बिखेरा जादू 🎶
संतोष महतो के लोकप्रिय गीत जैसे ‘भालोई धान होइलो ई बोछोर’ और ‘चल सजनी रीगल मैदाने’ ने उपस्थित दर्शकों के दिलों को छू लिया। उनकी प्रस्तुतियों ने संध्या के इस समय को ख़ास बना दिया। इस अवसर पर कई प्रमुख अतिथि उपस्थित थे, जिनमें सांसद विद्युत बरण महतो, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और अन्य स्थानीय नेता शामिल थे।
संस्कृति की रक्षा का संदेश
सांसद विद्युत महतो ने अपने विचार रखते हुए कहा कि टुसु पर्व विविधता में एकता का प्रतीक है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करें ताकि हम भीड़ का हिस्सा न बन जाएं। डॉ. प्रदीप बलमुचू ने युवाओं की भूमिका पर जोर दिया और संस्कृति की महत्वता पर चर्चा की।
आदिवासी एवं कुड़मी समुदाय का एकीकरण
आस्तिक महतो ने कुड़मी और आदिवासी समुदाय के बीच विवाद समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनों की शुरुआत से अब तक सभी जातियों को एकजुट रहने की आवश्यकता है।
मेला में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि 🌺
मुख्य मंच पर झारखंड राज्य आंदोलन के शहीदों की तस्वीरें रखी गई थीं, जहां अतिथियों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इनमें रघुनाथ महतो से लेकर भगवान बिरसा मुंडा जैसे प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के नाम शामिल थे।
स्व. सुनील महतो की याद में सम्मान
इस मौके पर उपस्थिति ने पूर्व सांसद स्व. सुनील महतो को भी याद किया, जिन्होंने टुसु मेला को गोपाल मैदान तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा
मेले में विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ, जिसमें टुसु, चौड़ल और बूढ़ी गाड़ी नाच के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।
- टुसु: 1. धनंजय महतो – 41,000 रुपये
- चौड़ल: 1. आदिवासी पुरन समिति – 31,000 रुपये
- बूढी गाड़ी नाच: 1. महावीर महतो – 15,000 रुपये
यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का अवसर था, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे और एकता का संदेश भी फैलाने में सफल रहा।
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