सिमडेगा के जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल में स्वर्ण जयंती पर भव्य सर्व धर्म सम्मेलन आयोजित हुआ

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एक नज़र में पूरी खबर

  • सिमडेगा स्थित जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल ने अपने स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में सर्व धर्म सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें मानवता, अहिंसा और भाईचारे के सिद्धांतों पर जोर दिया गया।
  • मुख्य अतिथि उपायुक्त कंचन सिंह ने सभी धार्मिक ग्रंथों में निहित अहिंसा और भाईचारे के संदेश का उल्लेख करते हुए इसे जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
  • इस अवसर पर विद्यालय की स्मारिका “स्वर्णिम पथ” और आचार्य पद्मराज स्वामी जी की पुस्तक “प्राकृत व्याकरण” का विमोचन किया गया, साथ ही समाज में योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

सिमडेगा में जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल का स्वर्ण जयंती समारोह

सिमडेगा स्थित जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल ने अपने स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक भव्य सर्व धर्म सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के गुरुओं, विद्वानों और समाजसेवियों ने एकत्र होकर मानवता, अहिंसा, सत्य और भाईचारे के सिद्धांतों पर जोर दिया। यहां सभी धर्मों की एकता और सेवा की भावना को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत और मुख्य अतिथि के विचार

इस समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। विद्यालय के प्रतिभाशाली छात्रों ने “दीपो ज्योति परम् ज्योति” मंगलाचरण प्रस्तुत कर कार्यक्रम के वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। मुख्य अतिथि उपायुक्त कंचन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सभी धार्मिक ग्रंथों में अहिंसा, सत्य, समन्वय और भाईचारे का संदेश निहित है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध पंक्ति “पर हित सरिस धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई” का उल्लेख करते हुए इसे जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

धर्म और मानवता की सेवा

विद्यालय के प्रबंधक राहुल प्रसाद ने स्वागत भाषण में कहा कि पूजा-पद्धतियों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन धर्म का मूल उद्देश्य मानवता की सेवा करना है। विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए, जिनमें वैदिक परंपरा के नारायण दास, इस्लाम के मौलाना शाकिब अहमद, जैन परंपरा की गुरुमा वसुंधरा, और गायत्री परिवार की प्रज्ञा कुमारी शामिल थे। सभी वक्ताओं ने धर्म को जीवन जीने की कला के रूप में परिभाषित किया।

श्रद्धांजलि और विचारों का आदान-प्रदान

इस कार्यक्रम में विद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय शीतल प्रसाद को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानाध्यापिका प्रभा केरकेट्टा ने योग, भक्ति और सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य अध्यक्ष आचार्य पद्मराज स्वामी जी महाराज ने समन्वयात्मक उद्बोधन में धर्म को मंजिल और विभिन्न मार्गों का वर्णन करते हुए प्रेम, अहिंसा एवं अनेकांतवाद का संदेश दिया।

विशेष गतिविधियाँ और सम्मान

इस अवसर पर विद्यालय की स्मारिका “स्वर्णिम पथ” का विमोचन किया गया, साथ ही आचार्य पद्मराज स्वामी जी की पुस्तक “प्राकृत व्याकरण” का लोकार्पण हुआ। गुरुमा वसुंधरा जी के भजन “रामह स्तुति” का मंचन भी किया गया। समाज में योगदान देने वाले व्यक्तियों को चादर और प्रतीक चिन्ह के माध्यम से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का समापन

सत्य श्री साइ परिवार के जिला अध्यक्ष गणपति बड़ाइक के नेतृत्व में सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। मंच संचालन पूर्व छात्र एवं पत्रकार शहजादा प्रिंस ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अध्यापिका लक्ष्मी ने प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम का समापन “धर्म का सार मानवता का संदेश” के साथ मंगलपाठ के साथ हुआ।

सामाजिक समरसता का प्रतीक

यह आयोजन विद्यालय के SMC सदस्यों, विद्या वनस्थली शिक्षा समिति, शिक्षकों और कर्मचारियों के सहयोग से सफल रहा, जो सामाजिक समरसता और धार्मिक सद्भाव का प्रतीक बना।

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