गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत्संग सभा द्वारा स्व0 रामकृष्ण मिढ़ा की पहली बरसी पर आज 12 अप्रैल,मंगलवार को विशेष दीवान सजाया गया.
गुरुद्वारा साहिब,श्री कृष्णा नगर कॉलोनी में श्री गुरुनानक सत्संग सभा के पूर्व सचिव स्व0 रामकृष्ण मिढ़ा की पहली बरसी के उपलक्ष्य में सजाए गए विशेष दीवान की शुरुआत सुबह 10 बजे स्त्री सत्संग सभा की शीतल मुंजाल द्वारा ” तेरा भांड़ा मीठा लागै…………” शबद गायन से हुई तत्पश्चात हजूरी रागी जत्था भाई महिपाल सिंह जी एवं साथियों ने ” कौन मुआ रे कौन मुआ ब्रम्हा ज्ञानी मिल करो विचारा एह तु चलत भया……….” तथा ” गोपाल तेरा आरता जो जन तुमरी भगत करंते तिन के काज संवारता…………” शबद गायन किया.

दीवान में विशेष रुप से पधारे विश्वविख्यात सिख पंथ के महान कीर्तनी जत्था भाई चमनजीत सिंह जी लाल ने ” देह नाम संतोखिया उतरे मन की भूख…………….” एवं ” जिनके चोले रतड़े प्यारे कंत तिना के पास नानक की अरदास……………..” एवं ” जग में उत्तम कांडीये विरले केई के…………” तथा ” विसर नाहीं दातार अपणा नाम देहो,गुण गांवां दिन रात नानक चाहो एहो…….…….” जैसे कई शब्द बनकर साध संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया.शबद कीर्तन के साथ साथ उन्होंने सिख इतिहास की साखियाँ भी सुनाई और साध संगत को वाहेगुरु का जाप कराया.शबद गायन से पहले उन्होंने स्व0 मिढ़ा की स्मृति में संगत के साथ श्री जपुजी साहिब जी का पाठ पढ़ा.

गुरुद्वारा श्री गुरुनानक सत्संग सभा के अध्यक्ष द्वारका दास मुंजाल एवं सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने स्वर्गीय मिढ़ा के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि कि वे गुरु घर के प्रति सदैव समर्पित रहते थे और समाज का कोई भी छोटा या बड़ा काम हो उन्होंने पूरे तन मन से सहयोग किया.उनकी गुरुघर के प्रति आस्था अटूट थी.गुरु घर के सेवक मनीष मिढ़ा ने स्व. रामकृष्ण मिढ़ा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे गुरु घर की अथक सेवा करने के अलावा समाज के सुख दुख में भी लोगों के बीच रहे और प्रशासनिक कार्यों का उन्हें काफी ज्ञान था.उनके असामयिक निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया.

श्री अनंद साहिब जी के पाठ तथा हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेंदर सिंह जी द्वारा अरदास एवं हुकुमनामा तत्पश्चात कढ़ाह प्रसाद वितरण के साथ दोपहर 2:30 बजे विशेष दीवान की समाप्ति हुई.इस मौके पर स्व0 मिढ़ा के सुपुत्र विक्की मिढ़ा को द्वारका दास मुंजाल ने सरोपा देकर नवाजा.समाप्ति के उपरांत सभा द्वारा गुरु का अटूट लंगर भी चलाया गया.

आज के दीवान में सुंदरदास मिढ़ा,हरविंदर सिंह बेदी,चरणजीत मुंजाल,नरेश पपनेजा, मोहन काठपाल, जीवन मिढ़ा,मोहनलाल अरोड़ा,अशोक गेरा,अमरजीत गिरधर, हरगोविंद सिंह, सुरेश मिढ़ा, विनोद सुखीजा, हरीश मिढ़ा,अनूप गिरधर,रमेश पपनेजा,इंदर मिढ़ा,हरि थरेजा,रमेश तेहरी,आशु मिढ़ा, नवीन मिढ़ा,महेंद्र अरोड़ा,जीतू अरोड़ा,हरजीत बेदी, जितेंद्र मुंजाल,हरीश नागपाल,कंवलजीत मिढ़ा,लक्ष्मण सरदाना,राजेन्द्र मक्कड़, लजीतू काठपाल,बसंत काठपाल,हरीश अरोड़ा,मनीष गिरधर,गौरव मिढ़ा,सूरज झंडई,रौनक ग्रोवर,गीता कटारिया,बबली दुआ,शीतल मुंजाल,नीता मिढ़ा,इंदु पपनेजा,रेशमा गिरधर,मंजीत कौर,बंसी मल्होत्रा,उषा झंडई,बिमला मुंजाल,मीना गिरधर,ममता थरेजा समेत अन्य श्रद्धालु शामिल थे.
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