बंगाल चुनाव से पहले चुनाव आयोग का महत्वपूर्ण कार्रवाई
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पूर्व, चुनाव आयोग (EC) और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय लॉटरी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। झारखंड-बंगाल सीमा पर स्थित मैथन-कल्याणेश्वरी चेकपोस्ट पर एक मिनी बस से 2.41 करोड़ रुपये मूल्य की फर्जी ‘डियर’ लॉटरी जब्त की गई।
बस की तलाशी में मिली जानकारी
सालानपुर थाना क्षेत्र में नाका पर पुलिस ने झारखंड से आ रही मिनी बस (नंबर: WB37C5476) को रोका। इसके बाद गहन तलाशी में बस के अंदर से 9 पेटियां बरामद हुईं। इन पेटियों में 1,108 बंडल लॉटरी टिकट पाए गए, जिनकी कुल संख्या 11,000 से अधिक है। इन फर्जी टिकटों की बाजार में कीमत लगभग 2.41 करोड़ रुपये आंकी गई है।
सिंडिकेट का विस्तृत नेटवर्क
पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय सिंडिकेट है। इस सिंडिकेट के संचालकों में धनबाद के गोविंदपुर-बरवाअड्डा निवासी मशरूल अंसारी और दयामय कुम्हाकार शामिल हैं। ये आरोपी पश्चिम बंगाल के सीतारामपुर रेड लाइट एरिया को अपने नेटवर्क का केंद्र बनाकर काम कर रहे हैं।
इस सिंडिकेट की सप्लाई चेन बिहार के सासाराम से शुरू होकर झारखंड के निरसा और झरिया होते हुए बंगाल के दुर्गापुर और बीरभूम तक फैली हुई है। इस खेप को आसनसोल में पोलटू सिंह नामक व्यक्ति को रिसीव करना था, जहाँ से इसे जामुड़िया और रानीगंज के डीलरों तक पहुँचाया जाना था।
चुनाव में संभावित पेमेंट बॉंड का खेल?
जांच एजेंसियों के लिए सबसे चौंकाने वाला पहलू इस मामले का चुनावी कनेक्शन है। जानकारों का मानना है कि इन फर्जी लॉटरी टिकटों का इस्तेमाल चुनाव के दौरान ‘पेमेंट बॉंड’ के रूप में किया जा सकता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि नकद की जगह इन टिकटों को भुगतान के रूप में दिया जाता है, जिन्हें बाद में सिंडिकेट के माध्यम से नकद में परिवर्तित किया जा सकता है।
राजस्व को हुआ भारी नुकसान
यह फर्जी लॉटरी असली ‘डियर’ लॉटरी की हूबहू नकल है। इससे न केवल आम जनता को ठगा जा रहा है, बल्कि पश्चिम बंगाल सरकार को भी करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।
प्रमुख बिंदु
- कार्रवाई का स्थान: मैथन-कल्याणेश्वरी चेकपोस्ट (सालानपुर)
- कुल जब्ती: 2.41 करोड़ की फर्जी लॉटरी, 9 पेटियां (1,108 बंडल)
- छपाई का केंद्र: प्राथमिक जांच में मैथन और निरसा में छपाई की बात सामने आई है
- जांच का दायरा: चुनाव आयोग और पुलिस अब इस सिंडिकेट के राजनीतिक कनेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है

