ईडी ने 14 इंजीनियरों को आरोपित किया, मंत्री से लेकर संतरी तक फैला भ्रष्टाचार का जाल।

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एक नज़र में पूरी खबर

  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले में 14 इंजीनियरों को नए आरोपियों के रूप में शामिल किया, जिससे कुल आरोपियों की संख्या 36 हो गई है।
  • जांच में पता चला है कि टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से 3% कमीशन लेना अनिवार्य था, जिसमें विभिन्न स्तरों पर राशि का बंटवारा होता था।
  • ED ने अब तक 38 करोड़ रुपये नकद जब्त किए हैं और 44 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को कुर्क किया है, जबकि 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

झारखंड में टेंडर घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, 14 इंजीनियर बने आरोपी

राँची: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) में करोड़ों रुपये के पैसे के हेरफेर के मामले में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ED ने 5वीं सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन शिकायत दर्ज करके 14 इंजीनियरों को नए आरोपियों की सूची में शामिल किया है। इस कार्रवाई के चलते अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपियों की कुल संख्या 36 हो गई है।

भ्रष्टाचार का संगठित ढांचा: ‘3% फिक्स कमीशन’

ED की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि विभाग में भ्रष्टाचार छिटपुट घटनाओं का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित कमीशन रैकेट का हिस्सा था। किसी भी ठेकेदार को टेंडर आवंटन के बदले कुल टेंडर मूल्य का 3% कमीशन देना अनिवार्य था। यह कमीशन विभिन्न स्तरों पर बंटता था:

  • मंत्री का हिस्सा: कुल टेंडर का 1.35% तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम के पास जाता था, जिसका संग्रह उनके सचिव संजीव कुमार लाल द्वारा किया जाता था।
  • नौकरशाही का हिस्सा: 0.65% से 1% की राशि विभागीय सचिव के लिए सुरक्षित रखी जाती थी।
  • इंजीनियरों का हिस्सा: शेष राशि मुख्य एवं निचले स्तर के इंजीनियरों में उनके रैंक के अनुसार बाँटी जाती थी।

करोड़ों का टेंडर और 90 करोड़ की ‘काली कमाई’

जांच एजेंसी ने पाया है कि लगभग 3,048 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन के दौरान यह घोटाला हुआ। इस प्रक्रिया में 90 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की गई थी। यह मामला जमशेदपुर ACB द्वारा दर्ज FIR (13/2019) से निकला है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच की गई थी।

नए घेरे में आए 14 इंजीनियर कौन हैं?

ED ने अपनी चार्जशीट में 23 से 36 तक के आरोपियों के रूप में निम्नलिखित अधिकारियों को नामित किया है, जिन पर अवैध कमीशन वसूलने का आरोप है:

  • मुख्य इंजीनियर (रिटायर्ड): सिंगराई टूटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार।
  • कार्यपालक इंजीनियर: संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार, अनिल कुमार (रिटायर्ड)।
  • असिस्टेंट इंजीनियर: राम पुकार राम, रमेश ओझा (दोनों रिटायर्ड)।
  • अन्य: पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ उमेश कुमार (रिटायर्ड)।

अब तक की कार्रवाई: आंकड़ों की जुबानी

ED ने इस मामले की गहराई से जांच के लिए झारखंड, दिल्ली और बिहार में 52 स्थानों पर छापेमारी की है। प्रमुख बरामदगी इस प्रकार रही है:

  • नकद जब्ती: ED ने 38 करोड़ रुपये नकद जब्त किए हैं, जिसमें से सबसे बड़ी राशि मंत्री के सचिव संजीव लाल के करीबी लोगों से मिली है (32.20 करोड़ रुपये)।
  • संपत्ति की कुर्की: अब तक 44 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया जा चुका है।
  • लग्जरी वाहन: अवैध धन से खरीदी गई 8 लग्जरी गाड़ियाँ भी ED की हिरासत में हैं।

न्यायिक स्थिति

इस मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके सचिव संजीव कुमार लाल और सहयोगी जहांगीर आलम शामिल हैं। ED द्वारा पहले दाखिल की गई चार्जशीट और 4 सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर अदालत ने पहले ही संज्ञान ले लिया है, जिससे आरोपियों की मुश्किलें बढ़ने की संभावना है।

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