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गुमला में पुलिस पर गोलीबारी के मामले में तीन माओवादियों को सजा
रांची: अपर न्यायायुक्त एके तिवारी की अदालत ने गुमला में पुलिस पर गोली चलाने के आरोप में माओवादी सामुएल हस्सा, चंबरा मुंडा और बिरसा मुंडा को 10-10 वर्ष की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक आरोपी पर 42-42 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है, जिसे न अदा करने पर अतिरिक्त जेल की अवधि काटनी होगी। इन तीनों को मंगलवार को दोषी ठहराया गया था। अदालत ने आर्म्स एक्ट के चार धाराओं के अंतर्गत एवं सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में सजा सुनाई है। सभी आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में थे। यह मामला नामकुम थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी सुनील कुमार तिवारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
ठेकेदार से लेवी मांगते समय गिरफ्तार हुए माओवादी
सूत्रों के अनुसार, यह घटना 11 जून 2022 को नामकुम के सोगोद गांव के पास हुई थी। जय माता दी कंस्ट्रक्शन कंपनी वहां ग्रामीण सड़क का निर्माण कर रही थी, तभी तीनों माओवादी ठेकेदार से लेवी मांगने पहुंचे। पुलिस को सूचना मिलते ही उन पर कार्रवाई के लिए पहुंची। हालांकि, उग्रवादियों ने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान सामुएल हस्सा को कमर में गोली लगी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीनों माओवादियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार भी बरामद किए गए। मामले की सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों का बयान पेश किया, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया।
गुमला में रिश्वत मामले में डीईओ की डिस्चार्ज याचिका खारिज
गुमला के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) सुनील शेखर कुजूर और कंप्यूटर आपरेटर अनूप किंडो की रिश्वत के मामले में विशेष एसीबी अदालत में प्रस्तुत डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने 4 अगस्त को दाखिल की गई इस याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। मामला शिक्षिका कुंती देवी की शिकायत से संबंधित है। आरोप है कि 12 मई 2023 को डीईओ ने माघी बालिका उच्च विद्यालय का निरीक्षण किया और उसके बाद शिक्षिका पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा। आरोप यह भी है कि कुंती देवी से दोषमुक्त करने के लिए एक लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। परेशान होकर शिक्षिका ने एसीबी को इसकी शिकायत की, जिसके बाद एसीबी की टीम ने 18 जनवरी 2024 को कुजूर और अनूप किंडो को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
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