प्रोफेसर माया ट्यूडर के सवाल, सीएम के जवाब
गांडीव स्पेशल
लंदन। यूनाइटेड किंग्डम में स्थित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय विश्व के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक है, जिसकी शिक्षा, शोध और सार्वजनिक विमर्श की परंपरा सदियों पुरानी है। इसका ब्लावातनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट – सार्वजनिक नीति, शासन और नेतृत्व के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान है, जो विश्वभर के नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं को जोड़ता है।
प्रोफ़ेसर माया ट्यूडर, ब्लावातनिक स्कूल में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और उनका शोध तुलनात्मक राजनीति, राज्य क्षमता और विकास पर केंद्रित है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ब्लावातनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में प्रशन-उत्तर सत्र प्रोफ़ेसर माया ट्यूडर के साथ –

झारखंड के विकास के लिए क्या है आपका रोडमैप ?
1. मैं आपसे झारखंड राज्य के लिए आपकी विकास को लेकर सोच के बारे में जानना चाहती हूँ। यह राज्य अपने वनों और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है, लेकिन साथ ही यहाँ जन-आंदोलनों का इतिहास भी रहा है जहाँ लोगों ने स्वयं को विकास की प्रक्रिया से अलग महसूस किया है।
उत्तर: गुड ईवनिंग एव्रीवन! सभी को झारखंड से जोहार! झारखंड, इंडिया का एक छोटा सा नया राज्य है, जो वर्ष 2000 में अपने अस्तित्व में आया।25 साल का है हमारा युवा झारखंड। सिल्वर जुबली मना रहा है अपना राज्य। और यह संजोग है कि हम लोग आज ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हैं, और ये कहा जाये कि यह एक सेलिब्रेशन भी हमारे लिए 25 साल का।और जैसे कि आपका सवाल है कि हमारा क्या विज़न है? तो मैं कहूँगा की बहुत डाइवर्सिटी है हमारे राज्य में।

राज्य अलग होने के बाद ये पहला मौक़ा है, जब झारखंड मज़बूती के साथ निवेश के लिए इंडिया से बाहर आया। पहले यह युवा झारखंड दावोस गया और उसके बाद यूके, आप लोगों के बीच यहाँ आया है। और इसे इत्तेफ़ाक कहें या सुखद अनुभव, कि दोनों चीजें एक साथ हुई – एक ट्राइबल डोमिनेटेड राज्य से एक ट्राइबल लीडरशिप, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पहली बार पहुंचा, साथ ही आप लोगों के बीच भी पहली बार आया। हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए साझा प्रयास को लेकर हम वैश्विक मंचों पर आए हैं।
बहुत बड़ी लेगेसी जुड़ी है हमारे झारखंड के साथ। आपके सेंट जॉन्स ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हमारे जयपाल सिंह मुंडा जी ने अपना ऐतिहासिक क्षण बिताया। हम उसी राज्य से आते हैं, और जिस तरीके से जयपाल सिंह मुंडा जी ने अपना एक इतिहास, अपनी एक छवि बनाई, आप लोगों के मार्गदर्शन में, तो हमने उस लेगेसी को भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया। जयपाल सिंह मुंडा स्कालरशिप के साथ आने वाली पीढ़ी को हम तैयार कर रहे हैं।
हमारा स्टेट माइन्स एंड मिनरल्स से परिपूर्ण राज्य है। नेचुरल रिसोर्सेस तो हैं ही हमारे राज्य में, साथ में हमारे राज्य में नैसर्गिक सुंदरता भी है। हमारे झारखंड में बहुत ही शांत स्वभाव के लोग रहते हैं, और इसी वजह से हमारे राज्य में यही कहा जाता है कि – वहाँ का बोलना ही गाना है, चलना ही नृत्य है। ये हमारे राम दयाल सिंह मुंडा जी थे जिन्होंने इस बात को बहुत अच्छे ढंग से दुनिया के सामने रखा था।
हम लोगों ने माइन्स-मिनरल्स से हटकर – एक नया रास्ता ढूँढने का प्रयास किया है। हमारे राज्य ने नक्सल का भी बहुत बड़ा दंश झेला है। परंतु, उस पर मैं बहुत ज़्यादा चर्चा नहीं करूँगा, चूँकि उसका बहुत बड़ा इतिहास है।
हमारा फोकस माइन्स एवं मिनरल्स से हटकर, एक नयी सोच पर है, वह है टूरिज्म, स्पोर्ट्स, एजुकेशन। और एक जो पूरे विश्व में आदिवासी समुदायों में देखा जाता है कि कहीं ना कहीं विकास के जो पैमाने हैं, विकास के जो रास्ते हैं, उसमें हम पीछे रह जाते हैं। लेकिन हमारा यह प्रयास है कि हम उन्हें पीछे नहीं, आगे बढ़ाने का काम करें। और इसी की एक कड़ी है कि हम आज जयपाल सिंह मुंडा स्कालरशिप भी चला रहे हैं,बल्कि इसके अलावा हम स्कूली शिक्षा से उच्च शिक्षा तक बड़े प्रोग्राम भी चला रहे हैं।
केंद्र में विरोधी सरकार है, राज्य को कैसे मिलेगी राहत।
2. सर, यह सवाल खास तौर पर छात्रों के लिए है। झारखंड ने अक्सर ऐसी सरकारें चुनी हैं जो केंद्र सरकार के विपक्ष में रही है, जिससे केंद्र–राज्य संबंध जटिल हो सकते हैं। विपक्ष के नेतृत्व वाले राज्य के रूप में,आप इस स्थिति को कैसे देखते हैं?
उत्तर: मैं आज देश से बाहर आया हूँ मलतब निवेश के लिए झारखण्ड बाहर आया है। और जिस राजनीतिक परिदृश्य की आप बात कह रहे है कि वह हमारी चुनौती है, मैं इसे बहुत ज्यादा उस नजर से नहीं देखता हूँ।इसे मैं फ़ेडरल स्ट्रक्चर का खूबसूरत मॉडल समझता हूँ कि हमारा देश एक लोकतान्त्रिक देश है और अलग-अलग विचार के लोग वहाँ रहते हैं। देश तो हमारा ही है। और जब तक राज्य मजबूत नहीं होगा तो देश भी मजबूत नहीं होगा। और मैं कहता हूँ की जब तक मेरा गांव मजबूत नहीं होगा तो मेरा राज्य भी मजबूत नहीं होगा। इसलिए मैं हमेसा फोकस करता हूँ कि हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था कैसे मजबूत हो।
हम लोग केंद्र के साथ हो सकता कि राजनीतिक रूप से अलग-अलग हों, क्यूँकि हम एक पार्टी चला रहे हैं और वो एक पार्टी चला रहे हैं। हमारे देश में अलग-अलग पार्टियाँ हैं और कई सारे राज्य हैं जहां अलग-अलग रीजनल पार्टी और नेशनल पार्टी, सब अलग-अलग ताकत के साथ हैं। और मुझे नहीं लगता कि बहुत बड़ी चुनौती है, हम यही झगड़ा करेंगे तो, संघीय ढांचा और लोकतान्त्रिक व्यवस्था का कोई मतलब रहेगा नहीं।
जिनका विकास में होगा जितना योगदान, क्या उनको उतना लाभ मिलेगा
3. मुख्यमंत्री जी, आपने कहा कि जिन लोगों ने विकास में जितना योगदान दिया, उन्हें उतना लाभ नहीं मिल पाया। मेरा प्रश्न यह है कि क्या भारत की राजनीतिक व्यवस्था वास्तव में इसे संभव होने देगी? एक ओर केंद्र के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना होता है, वहीं दूसरी ओर उन राज्यों से प्रतिस्पर्धा भी करनी पड़ती है जहाँ आपके राजनीतिक दल के सहयोगी सत्ता में हैं। इस राजनीति की बारीक रेखा को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: देश में सबसे अधिक माइन्स एंड मिनरल्स झारखण्ड में है। तब तो मैं यह भी कह सकता हूँ कि अपने राज्य का माइन्स एंड मिनरल्स किसी को न दूँ। कल कोई और स्टेट ये सोच सकता है – जैसे महाराष्ट्र है, आँध्र प्रदेश है, जो विकसित राज्य है वो भी ये सोचेंगे की मैं अच्छा कर रहा हूँ तो दूसरे राज्यों में पैसा क्यू जाये? केंद्र सरकार एक ब्रिज का काम करता है। सभी को समान देखना और उसको समझना होता है। हम लोग अपनी बातें रखते हैं। इलेक्शन के टाइम अप एंड डाउन दिखता रहता है, नहीं तो सबको साथ में ही चलना है।
और कहते हैं न कि एक हल के दो बैल होते हैं। तो एक बैल स्टेट है, और दूसरा बैल सेंट्रल है। दोनों को साथ ही चलना होता है, नहीं तो खेत नहीं बनता है। इसलिए आज के दिनों मुझे लगता है कि यह कोई समस्या नहीं है।
जयपाल मुंडा स्कॉलरशिप में सामान्य वर्ग और स्नातक के विद्यार्थियों को शामिल क्यों नहीं किया गया है?
4. मैं जानना चाहता हूँ कि जयपाल मुंडा स्कॉलरशिप में सामान्य वर्ग और स्नातक के विद्यार्थियों को शामिल क्यों नहीं किया गया है?
उत्तर: कुछ अलग-अलग खबरों के माध्यम से और जैसे आपने कहा है कि जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप में जनरल वर्ग को क्यूँ नहीं जोड़ा गया है। हमारा पूरा प्रयास है कि हम दूर तक और अच्छी गति से जाएँ, इसके लिए हम स्टेप बाइ स्टेप आगे जा रहे हैं। आपको पता है कि आज बच्चों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में जो बच्चे हैं उनके बारे में भी सरकार सोच रही है। आज कॉम्पटिशन बहुत बढ़ गया है जिससे हमारे सरकारी स्कूल के बच्चे पीछे रह जाते हैं। आपको पता होगा कि इसलिए हमने सीएम स्कूल ऑफ एक्सलेंस शुरू किया है। उसमें कोई बैरीअर नहीं है कि एससी,एसटी ही आएँगे, वह सभी के लिए है। और वो भी फ्री ऑफ कॉस्ट।
ओवरसीज स्कालर्शिप में सिर्फ एसटी को जोड़ा गया जिसके बाद डिमांड बढ़ने पर उसमें एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक को भी जोड़ा गया। अभी सीमित संख्या हमने रखी है 25 बच्चों की। और अभी डिमांड 150बच्चों का है।
आने वाले समय में वो रास्ता भी बनाएँगे। सेंट जोंस के साथ वार्ता चल रही है पीएचडी स्कालर्स के लिए कि उनके यूनिवर्सिटी में अपने बच्चों को भेज सकूँ। आज हमने गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड शुरू किया है। आपको पता है कि उसमें भी कोई बैरियर नहीं है। हायर एजुकेशन के लिए – टेक्निकल,मेडिकल, ज्यूडिशियल, आदि क्षेत्र में जो आपको अपना कोर्स सलेक्ट करना है, अगर उसमें वित्तीय परेशानी आती है तो उसके लिए सरकार आपको हैंड-होल्डिंग करती है। जिसमें बहुत कम रेट ऑफ इंटरेस्ट है और जब तक आपकी एजुकेशन पूरी नहीं हो जाती है, तब तक आपको कोई बैंक को रिटर्न देने की जरूरत नहीं होती है। उसके बाद आप धीरे-धीरे बैंक को पैसा वापस कर सकते हैं।
इसके साथ-साथ सरकार को अन्य क्षेत्रों में भी ध्यान देना होता है।सामाजिक क्षेत्र में। हमारा राज्य पिछड़ा भी है तो हमारी पहली प्राथमिकता कल्याणकारी योजनाओं पर भी रहती है। तो उनको भी लेकर हमें ज्यादा संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है। आने वाले समय में बहुत अच्छे और दरवाजे खोलने का काम करेगी सरकार, जहां हम सब के लिए एक कॉमन प्रोग्राम चला पाए। पहले जो कमजोर है, बिल्कुल जो पीछे है,उसे हम थोड़ा आगे लाने की कोशिश कर रहे हैं।
आप देखेंगे, हम मइयां सम्मान योजना चला रहे हैं। आज आबादी की 50प्रतिशत जो महिलाएं हैं – लगभग 56 लाख महिलाओं को हर महीने 2500रुपये की सहायता राशि हम देते हैं। बजट का बहुत बड़ा हिस्सा हम सिर्फ महिला सशक्तिकरण में खर्च कर रहे हैं। बहुत सारे लोग बोलते हैं यह पॉलिटिकल वोट बैंक का कॉन्सेप्ट है, लेकिन उसका इम्पैक्ट आप गांव जाओगे तो आप भी महसूस करोगे कि वो कैसे इस राशि का उपयोग अपने और अपने परिवार की भलाई और क्षमता वृद्धि के लिए कर रही हैं। बहुत सीधी बात है जैसे आपकी बाइक में जब तक बैटरी चार्ज नहीं होगी तो वह एक किलोमीटर भी नहीं चलेगी। ऐसे ही जब तक आपके जेब में पैसे नहीं होंगे तब तक आप कुछ और सोच भी नहीं पाएंगे आज के समय में।
क्या आपकी सरकार अतीत की ग़लतियाँ नहीं दोहराएगी?
5. जयपाल सिंह मुंडा और शिबू सोरेन की विरासत को सम्मान देते हुए, आपकी सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि भूमि अधिग्रहण और शोषणकारी विकास की अतीत की गलतियाँ दोहराई नहीं जाएँगी?आगामी 25 वर्षों में झारखंड कौन-सा ऐसा विकास मॉडल अपनाएगा, जिसमें आदिवासी वर्ग वास्तविक भागीदार और लाभार्थी बनें, और असमानता न बढ़े?
उत्तर: मैं आपको बताना चाहूंगा कि आपकी जो चिंता है, यह बहुत वास्तविक चिंता है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि झारखंड के आदिवासियों ने डेवलपमेंट के नाम पर बहुत कुछ खोया है। बड़े इंडस्ट्री आए, अनगिनत जमीनें ली गयीं। उस समय शायद हो सकता है कि जनसंख्या कम रही हो, लोगों ने दे दिया हो। लेकिन आज जनसंख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।
हां, जितना झारखंड के लोगों ने विकास में सहयोग किया उसका कहीं ना कहीं लाभ जो उनके पास आना चाहिए था वह नहीं आया। और यह वास्तव में लोगों की भी चिंता है| लेकिन आप को मैं यह विश्वास दिलाना चाहूंगा कि यह मेरा सेकंड टर्म है। वापस सरकार हमने बनाई है। हमारे देश में जो पॉलिटिकल परिदृश्य है, उसके विपरीत परिस्थिति में हम लोगों ने फिर से अपनी जगह बनाई है।
इसका मतलब यही समझा जा सकता है कि लोगों का विश्वास है। उम्मीद है हम पर। उन्हें पता है कि मैं शिबू सोरेन का बेटा हूँ| अपने लोगों के साथ धोखा नहीं कर सकता। तथा उन्हें और आज जो हमारी नई पीढ़ी है, नए पीढ़ी की जो डिमांड है, हम कोई भी आज प्लान बना रहे हैं तो हम अपने वहां की जो भावनाएं हैं उसको ध्यान में रखकर प्लान बना रहे हैं। आप देखेंगे कि वैश्विक स्तर में झारखंड के कई लोग हैं। मैं भी दावोस में था, वहां झारखंड के कई लोग थे। आज यूके में हूं, लंदन में हूं, यहां पर कई झारखंड के बच्चे और नौजवान हैं। पूरे देश-दुनिया में झारखंड के लोग पहुंच रहे हैं।
मैं जिस पीढ़ी का नेतृत्व कर रहा हूं। हमारी पुरानी लेगेसी हमारी लेफ्ट हैंड है, नई पीढ़ी हमारी राइट हैंड है, और मैं बीच में हूं। तो मैं चीजों को बैलेंस करते हुए आगे लेकर जा रहा हूं। और यह बात सही है कि कोई भी चीज डेवलपमेंट की है, अगर हम बात करते हैं तो हर एक चीजों में नेगेटिव-पॉजिटिव दोनों एक साथ चलता है। उसका बैलेंस कैसे बनाकर रखें, यही सबसे बड़ी चुनौती है। चीजों को नज़रंदाज़ करने की वजह से चीजें खराब होती हैं और ऐसा नहीं है कि हमारे स्टेट में इंडस्ट्री नहीं है।
एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट इंडस्ट्री हम लोगों के राज्य में है। एचईसी जैसी मदर इंडस्ट्री हमारे राज्य में है। बहुत सारे स्टील इंडस्ट्री हमारे राज्य में शुरू हुए। नई पीढ़ी को हम शिक्षित कर रहे हैं तो उसे रोजगार भी देना है और स्वरोजगार भी। माइंस, मिनरल्स के अलावा हमारे राज्य में नैसर्गिक सुंदरता भी है और जल, जंगल, जमीन को लेकर हमारी जो सोच है, वह भी कैसे संरक्षित रहे, हमारे लिए बहुत जरुरी है। इसे लेकर टूरिज्म पर भी हमारा बहुत ज़्यादा फोकस है।
हमारे गांव में जो बच्चे हैं, आज स्पोर्ट्स में काफी एग्रेसिव ढंग से आगे बढ़ रहे हैं। आपको बताना चाहूंगा कि हमारे खूंटी, सिमडेगा, गुमला से आज वूमेंस हॉकी टीम में लगभग 5 से 6 लड़कियाँ झारखंड से हैं। किसी समय उन्हें एक वक्त का खाना भी नहीं मिलता था| और आज ग्लोबल प्लाटफ़ॉर्ममें वह एक चैंपियन बनकर उभर रही हैं। और हमारे लोगों से जुड़े मामले जैसे ही हमारे संज्ञान में आते हैं, तो तुरंत ही उन सब चीजों पर काम किया जाता है।
अपने राज्य के युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए हम उन्हें पूरा सहयोग करते हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में इसी का हम एक रास्ता तलाशने आए हैं कि किसके साथ हम जाएं, जो हमारे उद्देश्य और लक्ष्य के साथ – एक सतत विकास के तहत आगे बढ़ सके। हमारे राज्य में विभिन्न वर्ग में काम में विविधता है। लेकिन अभी आदिवासी समाज को नया उद्योग चलाने के लिए बहुत आगे आना है। उसके लिए जो संसाधन चाहिए, पैसे चाहिए, वह उनके पास नहीं हैं। इस दिशा में भी हम काम कर रहे हैं।
क्या सरकार प्रवासी/ओसीआई झारखंडियों के लिए एक समर्पित इकाई स्थापित करेगी
6. हेमंत जी, कल्पना जी और झारखंड के माननीय प्रतिनिधियों का यहाँ आना हम प्रवासी झारखंडियों के लिए गर्व की बात है, और हम चाहते हैं कि ऐसे मंच नियमित रूप से आयोजित हों ताकि विदेशों में रह रहे डॉक्टर, पेशेवर और युवा राज्य से जुड़े रह सकें। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या सरकार प्रवासी/ओसीआई झारखंडियों के लिए एक समर्पित इकाई स्थापित करने पर विचार करेगी?
उत्तर: झारखंड ऐतिहासिक रूप से वर्करर्स देने वाला राज्य रहा है। देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान हमारे लोगों का रहता है। कोविड के दौरान हमें इसकी वास्तविक तस्वीर दिखी, हर साल 20 लाख से अधिक लोग आजीविका के लिए पलायन करते हैं। पलायन स्वयं समस्या नहीं है, समस्या अवसरों की कमी से मजबूरी में पलायन है। कोविड के समय हमने विशेष कदम उठाए। हवाई जहाज़, ट्रेन और बसों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित वापस लाया गया।
इसी दौरान हमने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों के लिए एक सशक्त प्रवासन नीति बनाई, जिसके बारे में आज राष्ट्रीय स्तर पर बताया भी जाता है। आज किसी भी संकट में, देश या विदेश में, रहने वाले झारखंडियों की सहायता की जाती है। प्रवासी झारखंडी समूहों को संगठित करने की दिशा में हम काम कर रहे हैं, और विदेशों में आप सभी की पहल का हम स्वागत करते हैं। सरकार आपको पूरा सहयोग देगी। झारखंड वैश्विक मंचों पर नया है, लेकिन हमारे लोग सक्षम, परिश्रमी और दृढ़ हैं। आप साथ दीजिए, आने वाले समय में हम जरुर इस दिशा में बढ़ेंगे और अवश्य सफल होंगे। जोहार!
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