मुंबई: दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद अब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है। इस कारण नरमी दिखाने का कोई आधार नहीं बचा है। हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को निर्देश दिया है कि वे 4 फरवरी 2026 को शाम 4 बजे तक संबंधित जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करें। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि उन्हें निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा का सामना करना होगा। यह आदेश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने दिया है।
कोर्ट ने निर्देश में कहा है कि राजपाल यादव ने M/s मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान करने के कई अवसर दिए, लेकिन हर बार वादे से मुकर गए। कोर्ट का मानना है कि ऐसा व्यवहार निंदनीय है और यह न्यायिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाने जैसा है।
सात मामलों में बड़ी देनदारी
कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, राजपाल यादव के खिलाफ कुल 7 मामले चल रहे हैं। इन मामलों में उन्हें हर केस के लिए 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि रजिस्ट्रार जनरल के पास पहले से जमा की गई राशि शिकायतकर्ता को जारी की जाए।
अदालत में बताया गया कि अक्टूबर 2025 में 75 लाख रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा किए गए थे, फिर भी लगभग 9 करोड़ रुपये की राशि अभी भी बकाया है। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी देनदारी के बावजूद भुगतान न करना गंभीर मामला है।
कोर्ट ने क्यों मानी सख्ती जरूरी
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बार-बार रियायत मांगने के बाद भी आदेशों का उल्लंघन किया गया। कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता ने अपनी देनदारी स्वीकार की और भुगतान का वादा किया, तब आदेशों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राजपाल यादव को पहले दी गई राहत को बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना जरूरी है ताकि न्याय प्रणाली में लोगों का विश्वास बना रहे। इसी आधार पर आत्मसमर्पण का आदेश जारी किया गया।
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