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मुंबई: फिल्म ‘मैंने प्यार किया’, जो 1989 में रिलीज हुई, ने हिंदी सिनेमा को एक अद्वितीय रोमांटिक जोड़ी दी। इस फिल्म में सलमान खान के अपोजिट भाग्यश्री ने सुमन के किरदार में अपनी मासूमियत से दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी पहली फिल्म ही एक बड़ी हिट साबित हुई, जिससे भाग्यश्री रातों-रात एक स्टार बन गईं। उनकी सादगी और सौम्यता आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई है।
शाही परिवार से शुरुआत
भाग्यश्री का जन्म 23 फरवरी 1969 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वह एक शाही परिवार से आती हैं, उनके पिता विजय सिंहराव माधवराव पटवर्धन और मां राजलक्ष्मी पटवर्धन हैं। जब उन्होंने फिल्म उद्योग में कदम रखा, तब वह हिमालय दासानी के साथ रिश्ते में थीं और अपनी पहली फिल्म के साल ही उन्होंने हिमालय से शादी कर ली। शादी के बाद उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया से किनारा कर लिया।
परिवार का महत्व
भाग्यश्री और हिमालय के दो बच्चे हैं, बेटी अवंतिका दासानी और बेटा अभिमन्यु दासानी, जिन्होंने भी अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा है। भाग्यश्री ने हमेशा अपने परिवार को प्राथमिकता दी। इसी वजह से उन्होंने अपने 37 साल के करियर में थोड़ी ही फिल्मों में काम किया है, लेकिन उनकी हर फिल्म को दर्शकों ने सराहा है।
वापसी और नए प्रोजेक्ट्स
1997 में भाग्यश्री ने कन्नड़ सिनेमा से अपनी वापसी की और हाल के वर्षों में उन्होंने सहायक भूमिका में काम किया। उन्हें ‘Radhe Shyam’, ‘Thalaivii’ और ‘Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan’ जैसी फिल्में में देखा गया, जहां उन्होंने अपने अभिनय से साबित किया कि वह आज भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
फिटनेस और खूबसूरती
आज, जब भाग्यश्री 57 वर्ष की हो गई हैं, उनकी फिटनेस और खूबसूरती चर्चा का विषय बनी हुई है। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स उनके हिट हैं। वह नियमित रूप से योग और हेल्थ टिप्स साझा करती हैं, और फैंस उनकी तस्वीरों पर अक्सर टिप्पणी करते हैं कि वह आज भी 27 जैसी लगती हैं। उनकी स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक सोच उनकी खूबसूरती का रहस्य मानी जाती है।
हालांकि भाग्यश्री ने ज्यादा फिल्में नहीं कीं, लेकिन उनका नाम आज भी ‘मैंने प्यार किया’ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने साबित किया है कि स्टारडम से ज्यादा ज़रूरी एक संतुलित और खुशहाल जिंदगी जीना है। उनकी मुस्कान और सादगी आज भी वही है, जिसने 1989 में दर्शकों को दीवाना बना दिया था। भाग्यश्री का सफर इस बात का उदाहरण है कि असली खूबसूरती वक्त के साथ और निखरती है।
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