डीबीटी योजना के लिए अभी भी 15 लाख बच्चों का नहीं खुला है बैंक खाता

by Aaditya HridayAaditya Hriday

जेईपीसी की निदेशक ने सभी जिलों को शत प्रतिशत बैंक एकाउंट खोलने का दिया निर्देश

रांची। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए राज्य सरकार ने सरकारी स्कूल के बच्चों का बैंक में खाता खोलवाने का निर्देश दिया था। ताकि डीबीटी के माध्यम से पैसा छात्रों के बैंक अकाउंट में चला जाय। इससे बिचौलिया और फर्जीवाड़ा पर लगाम लग सकता हैे। लेकिन सरकारी स्कूल के शिक्षकों की लापरवाही के कारण आज भी बड़ी संख्या में बच्चों का बैंक अकाउंट नहीं खुल पाया है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के ही अनुसार 38 लाख नामांकित बच्चों में से 23 लाख बच्चों का ही बैंक अकाउंट खुल पाया है। इस कारण सरकारी बच्चों को पोशाक, छात्रवृत्ति आदि की राशि नहीं मिल पा रही है। इससे बच्चे योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह जा रहे है। सरकारी स्कूल के बच्चों का बैंक अकाउंट खोलने का निर्देश झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद् द्वारा कई बार दिया गया है। लेकिन निर्देश धरा का धरा रह गया। निर्देश के अनुसार सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ क्लास तक के बच्चों का बैंक अकाउंट नि:शुल्क और जीरो बैलेंस पर खोलना है। स्थिति को देखते हुए एक बार फिर से जेईपीसी की राज्य परियोजना निदेशक किरण कुमार पासी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी और समग्र शिक्षा को एक पत्र लिखा है। जिसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का शत-प्रतिशत बैंक अकाउंट खोलने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए स्कूल के निकटतम बैंक ब्रांच को टैग कर बच्चों का बैंक अकाउंट खुलवाने को कहा गया है। उन्होंने कहा है कि इस काम में प्रखंड साधन सेवी (बीआरपी), संकुल साधन सेवी (सीआरपी) और स्कूलों के प्रधानाध्यापक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जिन स्कूलों के बच्चों का शत-प्रतिशत बैंक अकाउंट खुल जाएगा। उसके बीआरपी, सीआरपी और प्रधानाध्यापक को सम्मानित किया जाएगा। स्कूलों का यह भी निर्देश दिया गया है कि जिन बच्चों का बैंक अकाउंट खुल गया है, उसका भी विवरण जेईपीसी को उपलब्ध कराएं।

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