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झारखंड विधानसभा में बजट सत्र के दौरान बाबूलाल मरांडी का गंभीर आरोप
रांची: विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर कई गंभीर मामलों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने स्वास्थ्य, खाद्य, और गृह विभाग के बजट में कटौती के प्रस्ताव पर अपनी चिंताएं जताईं। बाबूलाल ने कहा कि नगड़ी में रिम्स-टू हॉस्पिटल के लिए प्रस्तावित जमीन आदिवासियों की खेती योग्य भूमि है, जिसे बचाने के लिए यदि उन्हें असामाजिक तत्व बनना पड़े, तो वे इसके लिए तैयार हैं।
सरकार की योजना पर सवाल
हेमलाल मुर्मू ने सदन में कहा कि नगड़ी में रिम्स-टू बनाने की प्रक्रिया सरकार के सकारात्मक कदमों के तहत चल रही है। लेकिन बाबूलाल ने सरकार से आग्रह किया कि यह अस्पताल आदिवासियों की भूमि से दूर, खाली एवं बंजर भूमि पर बनाया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि नगड़ी से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर इस परियोजना का निर्माण किया जा सकता है।
बजट की स्थिति पर विचार
बजट पर अपनी बात रखते हुए बाबOOLाल ने वित्त मंत्री और वित्त विभाग के बीच समन्वय की कमी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का बजट पिछले वर्ष की तरह ही प्रतीत होता है। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए एक शर्मनाक घटना की जानकारी दी, जिसमें एक पिता को अपने बच्चे के शव को डिब्बे में ले जाना पड़ा। इस पर मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि ऐसी खबरें विपक्ष का मुख्य कार्य हैं।
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की गंभीर स्थिति
बाबूलाल ने चाईबासा में थैलेसीमिया रोगी बच्चों के मामले का भी उल्लेख किया, जहां उन्हें एचआईवी संक्रमित रक्त प्रदान किया गया था। उन्होंने राज्य में 11,000 से अधिक थैलेसीमिया के मरीजों की स्थिति को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने एयर एंबुलेंस सेवाओं की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि अब तक कितने लोगों ने इसका लाभ उठाया है।
स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
मरांडी ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी पर भी विचार किया। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, झारखंड में 67.5 प्रतिशत बच्चे और 65.3 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इसके अलावा, डॉक्टरों में से 45 प्रतिशत और ए-ग्रेड नर्सों के 38.9 प्रतिशत पद खाली हैं। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, दवा खरीद और मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि कई लोग निजी अस्पतालों में इलाज के अभाव में भटकते रहते हैं।
खाद्य आपूर्ति में कठिनाइयाँ
खाद्य आपूर्ति विभाग पर बात करते हुए, बाबूलाल ने कहा कि केंद्र सरकार के कारण राज्य में लोगों को केवल पांच किलो अनाज मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, दाल और नमक पिछले आठ महीनों से उपलब्ध नहीं हैं, जो एक गंभीर समस्या है।
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