अजित पवार ने शरद पवार की छाया छोड़कर महाराष्ट्र में राजनीतिक नेतृत्व स्थापित किया

by Ananya Singh
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटनामा निधन

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के बारामती क्षेत्र के एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का हाल ही में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। यह विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अजित पवार सहित सभी यात्रियों की जान चली गई।

राजनैतिक यात्रा में पहला कदम

अजित पवार, जिन्हें सियासी जगत में “सियासत के बेताज बादशाह” के तौर पर जाना जाता है, ने अपने चाचा शरद पवार को अपना प्रेरणास्त्रोत मानते हुए राजनीति में कदम रखा। उन्होंने एनसीपी को महाराष्ट्र में मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पार्टी का एक बड़ा जनाधार तैयार किया। 2022 में शरद पवार से अलग होकर उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सरकार का गठन किया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ। वे शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के पुत्र हैं। उनके पिता एक फिल्म उद्योग से जुड़े थे और अजित की शादी सुनेत्रा पवार से हुई। उनके दो बच्चे, पार्थ पवार और जय पवार हैं।

शिक्षा और प्रारंभिक राजनीतिक करियर

अजित पवार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल बारामती से प्राप्त की। कॉलेज के समय में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बादउन्होंने राजनीति में कदम रखा। 1982 में शरद पवार के मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया, और उस समय वे सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने गए।

सांसद और विधायक के रूप में उपलब्धियां

1991 में वे बारामती संसदीय क्षेत्र से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन बाद में यह सीट अपने चाचा के लिए खाली कर दी। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बाद 1995 में बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद से वे लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे।

कैबिनेट मंत्री से उपमुख्यमंत्री बनने तक का सफर

45 वर्षों के करियर में, अजित पवार ने कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर कार्य किया। 1999 में जब कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में आई, तो उन्हें सिंचाई मंत्री का कार्यभार सौंपा गया। 2019 में उन्होंने दो बार उपमुख्यमंत्री की शपथ ली, पहली बार देवेंद्र फडनवीस के तहत और बाद में उद्धव ठाकरे के तहत। 2023 में वे फिर से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने।

चाचा से बगावत और नई राह

2022 में, जब शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाना शुरू किया, तो अजित पवार ने अपने राजनीतिक रास्ते को बदलने का निर्णय लिया। उन्होंने एनसीपी के कई नेताओं के साथ भाजपा की महायुति सरकार में शामिल होने का निर्णय लिया, और 2023 में उन्होंने पार्टी पर पूरी तरह से नियंत्रण प्राप्त कर लिया।

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