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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
बिहार में चुनावों का डिजिटल तूफान 🌪️
बिहार में विधानसभा चुनाव का माहौल पूरी तरह से तैयार है। पारंपरिक चुनाव प्रचार, जैसे पोस्टर और नुक्कड़ नाटक, अब नई सीमाओं पर पहुंच चुका है। एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित वीडियो अब राजनीतिक समर में एक नया हथियार बन गए हैं। ये वीडियो न केवल मनोरंजक हैं, बल्कि जनता की सोच को प्रभावित करने में भी सक्षम हैं, खासकर युवा पीढ़ी पर इनका गहरा असर देखने को मिल रहा है।
एआई का राजनीतिक प्रचार में उभरता हुआ स्थान
तकनीकी विकास के साथ, एआई वीडियो का उपयोग अब चुनाव प्रचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। भाजपा, कांग्रेस, जदयू और राजद जैसे प्रमुख दलों के बीच एआई वीडियो को लेकर एक प्रतियोगिता चल रही है। ये वीडियो विपक्ष की कमजोरियों को उजागर करने के लिए सक्रिय रूप से उपयोग किए जा रहे हैं। कांग्रेस का हालिया वीडियो “साहब के सपनों में आई मां” ने काफी हंगामा उत्पन्न किया है, जिसके चलते हाईकोर्ट से इसे हटाने का आदेश भी आया।
डिजिटल प्लेटफार्म: नए प्रभाव का माध्यम
कांग्रेस के सोशल मीडिया पेज पर वोट चोरी, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर आधारित वीडियो की भरमार है। वहीं, भाजपा चारा घोटाले और बिहार की पिछली स्थिति को दर्शाते हुए जनता को जागरूक कर रही है। जदयू ने बिहार के विकास के मुद्दे को प्रस्तुत करते हुए तेजस्वी यादव को भविष्य के सीएम के रूप में पेश किया है। इस पूरे परिदृश्य में एआई वीडियो अब एक मुख्य भूमिका निभा रहा है, जो चुनावी संदेशों को तेजी से फैलाने का काम कर रहा है।
एआई वीडियो की थीम्स
- एआई द्वारा बनाए गए कार्टून से मुद्दों की व्याख्या।
- पूर्व की घटनाओं को दिखाकर नेताओं पर कटाक्ष।
- अपने पक्ष में लोगों की राय को प्रकट करना।
- समय के साथ विकास या अवनति को दर्शाना।
- समस्याओं को मतदाताओं तक पहुंचाना और विपक्ष पर प्रहार करना।
भाजपा-जदयू की रणनीतियाँ
भाजपा और जदयू ने तेजस्वी यादव और राहुल गांधी पर कई एआई वीडियो पेडिंग किए हैं। भाजपा का “हम समय बानी” वीडियो लालू परिवार के अंतर्विरोधों को उजागर करता है। जदयू ने भी बिहार में बदलाव को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया है, जिसमें नीतीश कुमार के भाषणों और निर्णयों के वीडियो शामिल हैं।
विपक्ष की पहल
कांग्रेस भी पीछे नहीं है। “बवाल बिहारी” सीरिज के तहत बेरोजगारी और वोट चोरी जैसे मुद्दों को उठाया जा रहा है। कांग्रेस ने पीएम मोदी और चुनाव आयोग पर भी कटाक्ष करते हुए कई वायरल वीडियो बनाए हैं। राजद ने भी तेजस्वी के सकारात्मक दृष्टिकोण को लेकर वीडियो साझा किए हैं, जो संभावित मतदाताओं को आकर्षित करने में सहायक हो सकते हैं।
निष्कर्ष
बिहार में चल रहे विधानसभा चुनाव में एआई वीडियो का उपयोग एक नया आयाम पेश कर रहा है। यह न केवल राजनीतिक मुद्दों को उठाने का माध्यम है, बल्कि इसे वोटरों के बीच संवेदनशीलता और बातचीत को बढ़ावा देने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया में यह तकनीक अब एक आवश्यक तत्व बन चुकी है।
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