Netflix-YouTube जैसे OTT प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री के लिए अब Aadhaar प्रमाणन अनिवार्य

by RahulRahul
Netflix-YouTube जैसे OTT पर अश्लील कंटेंट रोकने के लिए अब Aadhaar वेरिफिकेशन जरूरी

OTT कंटेंट के लिए आधार वेरिफिकेशन: भारत के उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि ऑनलाइन सामग्री देखने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपनी उम्र की पुष्टि आधार या पैन कार्ड के माध्यम से करनी हो सकती है। यह उपाय उन सामग्रियों पर लागू होगा, जिन्हें ‘अश्लील’, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ‘आपत्तिजनक’ या ‘राष्ट्र-विरोधी’ माना जाएगा। यह जानकारी जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच द्वारा डिजिटल कंटेंट नियमों पर चल रही सुनवाई के दौरान पेश की गई थी।

यह नवीनतम अपडेट सर्वोच्च न्यायालय के एक सुझाव से संबंधित है, जिसे अभी सरकारी नियमों में शामिल नहीं किया गया है। यह सुझाव 27 नवंबर, 2025 को हुई सुनवाई में सामने आया था।

विवरण क्या है?

विवाद उस समय उत्पन्न हुआ जब लोकप्रिय यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया, सायम रैना और कुछ अन्य प्रस्तुतकर्ताओं के खिलाफ ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो के एक एपिसोड में अश्लील टिप्पणियों के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। इस शो में कुछ ऐसे चुटकुले और संवाद थे, जो विकलांगों और संवेदनशील मुद्दों पर अनुचित समझे गए। इसी वजह से यह मामला उभरा।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमल्या बागची की बेंच द्वारा की जा रही थी। सुनवाई में, बेंच ने चिंता जाहिर की कि यूट्यूब, नेटफ्लिक्स और अन्य OTT प्लेटफार्मों पर उपलब्ध यूजर-जनरेटेड कंटेंट के लिए मौजूदा नियम पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अश्लील या हानिकारक सामग्री की उपलब्धता नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य और समाज की नैतिकता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

एडल्ट कंटेंट को रोकने के लिए आधार वेरिफिकेशन का सुझाव

ऑनलाइन अश्लील सामग्री को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि किताबों या पेंटिंग में अश्लीलता अलग होती है, जहां नीलामी होने पर रोक लगाई जा सकती है। लेकिन मोबाइल फोन पर, यह स्थिति भिन्न है, क्योंकि एक बार फ़ोन ऑन करने पर सामग्री तुरंत सामने आ जाती है।

CJI सूर्यकांत ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जबकि प्लेटफॉर्म चेतावनी प्रदर्शित करते हैं, वह केवल कुछ सेकंड के लिए होती है और उसके बाद शो तुरंत शुरू हो जाता है। इसलिए आधार वेरिफिकेशन का विकल्प उपयुक्त हो सकता है, जो दर्शकों की उम्र की पहचान कर सके। इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सुझाव है और कोई अनिवार्य आदेश नहीं है।

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