रांची। भाजपा विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आदिवासियों को सताने के मामले में मीर जाफर से भी आगे निकल गये हैं। बाबूलाल ने ट्विट कर कहा कि लालू यादव के राज में भले ही चारा लूट हुई, लेकिन किसी की मजाल नहीं थी की उनके समाज (यादवों) के लोगों को कोई बेवजह तंग-तबाह करने की सोचे, लेकिन झारखंड में राजेंद्र दुबे, नूर मुस्तफा और प्रमोद मिश्रा जैसे लोग हेमंत सोरेन के संरक्षण में विजय हांसदा और चुनका टुडू जैसे अनेकों आदिवासियों को बर्बाद कर देते हैं। उन्हें गालियां देते हैं। बाबूलाल ने कहा कि हेमंत सोरेन को आदिवासियों को प्रताड़ित और बर्बाद होता देखकर मजा आता है। शायद यही वजह है कि वे पंकज मिश्रा जैसे लोगों पर कार्रवाई करने के बजाये उल्टे उन्हें बचाने का काम करते हैं। आदिवासियों को सताने के मामले में मीर जाफर से आगे निकले हेमंत सोरेन की गद्दारी कथा पढ़कर अगली पीढ़ी क्या सोचेगी। वहीं राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरते हुए बाबूलाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने गढ़वा की बेबी कुमारी की पढ़ाई को लेकर जो तत्परता दिखाई वो सराहनीय है, लेकिन अपनी राजनीतिक यात्रा से निकलकर जरा उन स्कूलों पर भी ध्यान दें जहां लंबे समय से शिक्षक स्कूलों से गायब है। राज्य में 90 हजार शिक्षकों की नियुक्ति लटकी पड़ी है। बच्चों को कॉपी, किताब तक नहीं मिल पा रही है। सरकार के शिक्षा विभाग की लचर व्यवस्था का खामियाजा आज राज्य के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
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