‘द कश्मीर फाइल्स’ में कृष्णा पंडित का रोल प्ले कर रहे दर्शन कुमार का इंटरव्यू :कश्मीरी पंडित महिला को पति के खून से सने चावल खिलाए गए, ये कहानी सुन सन्न रह गया

by Aaditya HridayAaditya Hriday
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द कश्मीर फाइल्स में कृष्णा पंडित का रोल निभाने वाले दर्शन कुमार के दिमाग पर इतना गहरा असर पड़ा कि वो डिप्रेशन में आकर अकेले में बड़बड़ाने लगते थे। रात में नींद से उठकर बैठ जाते थे। फिल्म साइन करने से लेकर, इसे शूट करने तक दर्शन का सफर काफी दर्दनाक रहा है

पीड़ितों के वीडियो दिखाकर ऑफर की गई थी फिल्म-

मुझे कास्टिंग डायरेक्टर तरण बजाज का कॉल आया कि विवेक रंजन मुझे फिल्म में लीड रोल देना चाहते हैं। मैं विवेक और पल्लवी जी से मिला। उन्होंने मुझे तकरीबन एक घंटे का वीडियो दिखाया, जिसे उन्होंने देश-दुनिया में घूमकर पीड़ितों के वीडियो बनाए थे। उसे देखकर मैं सन्न रह गया, कुछ बोल नहीं पाया। उन्होंने कहा कि आपकी कंडीशन समझ सकता हूं। एक काम कीजिए, आप स्क्रिप्ट लेकर जाइए और पढ़कर फैसला लीजिए। स्किप्ट में जो-जो बातें और दर्द लोगों ने बयां किया है, उन चीजों को डायलॉग में पिरोकर रखा गया है। इस फिल्म को करने का यही मेरा मेन रीजन रहा।

वीडियो देखकर दिल दहल गया था

जैसे ही वीडियो स्टार्ट हुआ, पहले ही सीन देखकर मैं रोने लग गया था। कई फैमिली अपने बारे में बता रही थी। एक जगह पति को मारकर खून से सने चावल को उसकी पत्नी को खिलाया गया, जिसे देखकर दिल दहल गया।

मैं कई रातों तक सो नहीं पाया

स्क्रिप्ट पढ़ने से लेकर फिल्म करने तक, दो महीने की जर्नी रही। मैं जिस दिन वीडियो देखा था, उस रात को बिल्कुल सो ही नहीं पाया। मैंने स्क्रिप्ट भी पढ़ी थी। वहां से लेकर फिल्म करने तक मुझे याद नहीं कि किसी रात को ढंग से सो पाया हूं। कई बार ऐसा हुआ कि मैं खुद से बड़बड़ाने लग गया था। मुझे लगा कि मैं डिप्रेशन में जा रहा हूं। मैं छोटी-सी बात पर इरिटेट हो जाता था। किसी को कुछ भी बोल देता था।

किरदार से निकलने में दो महीने लगे

इससे उबरने के लिए मैंने मेडिटेशन का सहारा लिया। दो सप्ताह की छुट्टियां लेकर एकांत जगह पर गया। हिमाचल प्रदेश स्थित धर्मशाला गया। वहां पर होटल लेकर कई दिनों तक रहा। लोगों से मिलना-जुलना किया, ताकि इन चीजों से बाहर आ सकूं। वहां दिन में घंटों-घंटों मेडिटेड करता था। कोशिश करता था कि कुछ अच्छे और डिफरेंट सब्जेक्ट देखूं, जिसमें इंगेज रहूं और काफी चीजों के बारे में सोचूं नहीं।

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मैं तो एक एक्टर हूं | 15 -20 दिनों में बाहर निकल आया , लेकिन जिन लोगो पर बीती है , वे आज भी कोमा में हैं | वो आज भी raat को सो नहीं पाते हैं |अकेले घर में रह नहीं पाते हैं | सोचिए , उनकी क्या कंडीशन रही होगी |

एक टेक में ओके हुआ क्लाइमैक्स सीन

जब पहली बार स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए मिली थी, तब सीन को लेकर बहुत एक्साइटेड था और उससे ज्यादा नर्वस भी था। डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कहा था वो सीन पैच में शूट करेंगे, क्योंकि 13 पेज का सीन था और एक साथ 13 पेज का मोनोलॉग बोलना नहीं हो पाएगा। यह क्लाइमेक्स सीन था, मैंने विवेक सर से कहा कि इसे वन टेक में करने की कोशिश करूंगा। मैंने एक-एक चीज पर रिसर्च की, क्योंकि मुझे लगा कि जब तक मैं कंविंस नहीं होऊंगा, तब तक ऑडियंस तक नहीं पहुंचा पाऊंगा।

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किरदार के हर मोमेंट को जिया

मेरा कैरेक्टर कृष्णा पंडित बहुत ही कंफ्यूज लड़का है, उसके सामने डिफरेंट-डिफरेंट नरेटिव रखे जाते हैं। मेरे दादा जिनका किरदार अनुपम खेर प्ले कर रहे हैं, उनके साथ सब कुछ घटा है, उन्होंने सब कुछ देखा है। इसके बाद पल्लवी मैडम, जो राधिका मेनन का कैरेक्टर प्ले कर रही हैं, उनका अपना एक अलग ही नरेटिव है, जो यूनिवर्सिटी में बताया जाता है। इन चीजों को देखकर उसमें घुस गया, ताकि उस मोमेंट को जी सकूं न कि एक्ट करूं।

लोग चार्टेड प्लेन से फिल्म देखने आ रहे हैं

लोगों का जो रिएक्शन आ रहा है, मैं उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता। पहली बार ऐसा लग रहा है कि यह फिल्म लोगों के दिलों को छू गई है। इस फिल्म को लोग इमोशन की तरह ले रहे हैं। इस फिल्म को लोग देखकर प्रमोट और सपोर्ट भी कर रहे हैं। सबसे कमाल की चीज यह रही कि UAE से दो-तीन चार्टेड प्लेन, जिसमें ढाई-ढाई सौ, चार-चार सौ लोग सुबह आए और फिल्म देखकर शाम तक वापस चले गए।

यकीन था कि फिल्म लोगों को जरूर छुएगी

मैंने जब स्क्रिप्ट पढ़ी थी, तब लगा कि बड़ी ऑनेस्ट फिल्म है। लोगों के दिलों को पक्का छुएगी। लोग सच्चाई जानने की कोशिश जरूर करेंगे, लेकिन इस तरह देखेंगे, ऐसी उम्मीद तो बिल्कुल नहीं थी। लोग सच्चाई जानना चाह रहे हैं, इसे प्रमोट कर रहे हैं, ऐसी उम्मीद तो बिल्कुल नहीं थी।

फिल्म के बाद मेरी ओर फिल्ममेकर्स की सोच बदल गई है

मैंने जब भी किसी ए-लिस्टर डायरेक्टर से मिलता था, तब वे मुझे एक स्टोरी नहीं, बल्कि चार स्टोरी सुनाते थे। वो कहते थे, मैं चाहता हूं कि तुम कुछ करो। तुम लीड करो, लेकिन अभी तुम कुछ बन जाओ ताकि प्रोड्यूसर तुम पर पैसे लगाने शुरू कर दें। बॉक्स ऑफिस पर ऐसा कुछ कर दो ताकि बैकअप देने के लिए प्रोड्यूसर आने लग जाएं। मैं उन्हें बताता था कि यह तो आप ही करेंगे। अब लगता है कि उनकी यह सोच बदल गई है। अब मुझे सामने से फोन आ रहे हैं। अब चीजें बदल जाएं, तब भगवान का शुक्रगुजार रहूंगा। मैं जिस तरह का रोल करना चाहता हूं, अब शायद वैसे रोल मिल जाएंगे।

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अनुपम खेर के साथ शूटिंग करने से पहले नर्वस था

हम सेट पर गए थे। पहली बार दादा बने अनुपम खेर के साथ शूट करने वाले थे और लोकेशन हमारे घर का था। मैं एक्साइटेड और थोड़ा नर्वस भी था। विवेक जी आए, हमें लगा कि सीन के बारे में समझाएंगे, लेकिन उन्होंने आते ही कहा कि आप लोग एक-दूसरे के साथ पहली बार काम कर रहे हो। अगर आप लोग अपनी केमेस्ट्री को डेवलप करने और इस घर को अपना बनाने के लिए थोड़ा टाइम लेना चाहते हो, तो ले सकते हो।

फिर तो डेढ़-दो घंटे वहां समय बिताया। वह एक-डेढ़ घंटा हमारे लिए इतना कमाल का हो गया। अनुपम खेर के साथ हमारी केमेस्ट्री भी बहुत डेवलप हो गई। अब वही सीन सराहे जा रहे हैं। यह एक अच्छे डायरेक्टर की पहचान होती है। पहले तो विवेक जी और पल्लवी जी का थैंकफुल हूं, जो उन्होंने मुझ पर विश्वास किया और इस फिल्म का पार्ट बनाया।\

सेट पर सबकी कोशिश थी कि कहानी जस्टिफाई कर सकें

सेट का माहौल एकदम फैमिली जैसा था। हम में से किसी को यह याद नहीं था कि हमारा कोई मेकअप रूम भी है या फिर वैनिटी वैन है। एक ट्रू स्टोरी पर काम कर रहे थे, हमारा फोकस था कि जितना हो सके कहानी जस्टिफाई कर सकें। मेरा कैरेक्टर हर वक्त असमंजस में रहता है इसलिए डायरेक्टर की कोशिश थी कि हम सेट पर उस तरह की बातें न करें, जिससे मेरा झुकाव एक तरफ न बढ़ जाए।

डायरेक्टर की तरह क्या आपको भी धमकी मिली?

नहीं, अभी तक तो नहीं। मैं तो एक एक्टर हूं। मेरे सामने जो लाया गया, उसे पेश कर दिया। मुझे लगा कि सच्चाई लोगों के सामने लानी चाहिए, उसे पेश किया।

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