सीएम हेमंत सोरेन की मांग पर कोल मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन
रांची। कोयला मंत्रालय ने झारखंड के माइंस एरिया के रैयतों को पुर्नवास नीति के तहत बड़ी राहत देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मांग को कोयला मंत्रालय ने गंभीरता से लिया और स्थानीय रैयतों को एक करोड़ रुपये तक का टेंडर या ठेकेदारी देने का निर्णय लिया है। इसको लेकर कोल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना में कहा गया है कि जिन रैयतों को कोल कंपनी में नौकरी या पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है। उन्हें स्थानीय स्तर पर माइंस में एक करोड़ तक का ठेका दिया जाएगा। पिछले नवंबर महीने में रांची दौरे पर आये केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बैठक हुई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय मंत्री से रैयतों की समस्या से अवगत कराते हुए कई मांग रखी थी। कोल मंत्रालय के इस फैसले के अनुसार अगले 2 वर्ष तक माइंस क्षेत्र के 30 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले रैयतों को 1 करोड़ तक का ठेका मिल सकेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज ट्वीट कर इस फैसले का स्वागत किया है। कोल इंडिया पर स्थानीय रैयतों की ओर से पुनर्वास नीति का पालन नहीं करने का आरोप लगा रहे थे। यही वजह है कि कई माइंस क्षेत्र की जमीन अधिग्रहण का विरोध किया गया। राज्य और केंद्र सरकार ने बीच का रास्ता निकाला है और रैयतों को सुविधा मुहैया कराने का निर्णय लिया गया है। अब झारखंड के सभी सीसीएल कोल माइंस के सिविल वर्क में स्थानीय लोगों को लगाया जाएगा। वहीं, कोल ट्रांसपोर्टेशन में भी स्थानीय को काम दिया जायेगा। इसके लिए स्थानीय ठेकेदार को सौ फीसदी अरनेस्ट मनी और परफॉर्मेंस सेक्योरिटी से राहत दी गई है। इसके अलावे स्थानीय लोगों को सिर्फ बैंक गारंटी सर्टिफिकेट के आधार पर काम दिया जाएगा।
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