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एक नज़र में पूरी खबर
- परवीन बाबी ने 1973 में फिल्म चरित्र से अपने करियर की शुरुआत की और लगभग 15 सालों में 50 से अधिक हिट फिल्मों में काम किया।
- उनकी मानसिक बीमारी ने उनके करियर और व्यक्तिगत संबंधों पर गहरा असर डाला, जिसके कारण उन्होंने समाज से अलगाव महसूस किया।
- 2005 में परवीन बाबी का निधन हुआ, और उनकी लाश कई दिनों बाद उनके फ्लैट में मिली, जिसमें भूख और डायबिटीज को मौत का कारण बताया गया।
परवीन बाबी: बॉलीवुड की एक असाधारण कहानी
मुंबई: परवीन बाबी का नाम 1980 के दशक में न केवल खूबसूरती का प्रतीक था, बल्कि वह अपने बोल्ड अंदाज के लिए भी जानी जाती थीं। उनकी स्क्रीन पर उपस्थिति इतनी प्रभावशाली थी कि दर्शक उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते थे। वह उस दौर की सबसे खूबसूरत और आत्मविश्वासी महिलाओं में से एक मानी जाती थीं। हालांकि, उनकी असली जिंदगी ग्लैमर से परे एक अलग कहानी बयां करती है। जहां बाहर की दुनिया में उनकी छवि चमकती थी, वहीं अंदर की जिंदगी में वह अकेलेपन, डर और मानसिक तनाव से जूझ रही थीं। यही विरोधाभास उनकी जिंदगी को एक रहस्य बना देता है।
परवीन बाबी ने अपने करियर की शुरुआत 1973 में फिल्म चरित्र से की थी। जैसे ही उन्होंने कदम रखा, उनके अलग अंदाज ने उन्हें भीड़ से अलग कर दिया। पारंपरिक भूमिकाओं से हटकर उन्होंने वेस्टर्न और ग्लैमरस किरदार निभाए, जो उस समय का नया ट्रेंड था। लगभग 15 साल के करियर में उन्होंने 50 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिनमें दीवार, नमक हलाल, काला पत्थर और अमर अकबर एंथनी जैसी हिट फिल्में शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें सुपरस्टार बना दिया।
बड़े सितारों के साथ बनाई हिट जोड़ी
परवीन बाबी ने उस युग के लगभग सभी बड़े सितारों के साथ काम किया। अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, शशि कपूर, विनोद खन्ना और जीतेंद्र जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा। उनकी निजी जिंदगी भी चर्चा का विषय रही, जिसमें महेश भट्ट और डैनी डेन्जोंगपा के साथ उनके रिश्तों की खबरें सुर्खियों में रहीं। महेश भट्ट ने बाद में बताया कि परवीन मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं, जिसने उनके करियर और व्यक्तिगत संबंधों पर गहरा असर डाला।
जब डर और शक ने बदल दी थी एक्ट्रेस की जिंदगी
परवीन बाबी के जीवन के अंतिम दिनों में उनकी मानसिक स्थिति काफी बिगड़ गई थी। उन्होंने कई चौंकाने वाले आरोप लगाए, जिसमें राजीव गांधी, रोनाल्ड रीगन और अमिताभ बच्चन तक पर साजिश करने का आरोप लगाया। उनका दावा था कि कुछ शक्तिशाली लोग उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, जिसने उद्योग और उनके प्रशंसकों को हैरान कर दिया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को समाज से अलग कर लिया, और उनका अकेलापन और डर बढ़ता गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, परवीन बाबी के पास करोड़ों की संपत्ति थी, लेकिन इसके बावजूद उनकी जिंदगी में जरूरी चीजों की कमी हो गई थी। न तो उन्हें सही इलाज मिला और न ही कोई करीबी जिसने उनका ध्यान रखा। यही कारण था कि उनका जीवन कठिन होता चला गया।
कई दिनों तक घर में पड़ी रही लाश
2005 में परवीन बाबी का निधन मुंबई स्थित उनके फ्लैट में हुआ। सबसे दुखद यह था कि उनकी मौत के बारे में कई दिनों तक किसी को पता नहीं चला। जब दरवाजा खोला गया, तब उनकी लाश अंदर मिली। पोस्टमॉर्टम में बताया गया कि उनकी मौत का कारण डायबिटीज और भूख थी। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे भूख से हुई मौत के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।
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