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एक नज़र में पूरी खबर
- झारखंड सरकार ने पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में 294 अराजपत्रित पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है।
- भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से लिखित परीक्षा के माध्यम से की जाएगी, जिससे चयन में पारदर्शिता और योग्यता सुनिश्चित होगी।
- इस भर्ती से तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
रांची। झारखंड सरकार ने तकनीकी शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में अराजपत्रित श्रेणी के 294 पदों की भर्ती प्रक्रिया आरंभ कर दी है।
इन पदों के लिए अधियाचना झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को भेजी गई है, जिसके बाद जल्द ही विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
भर्ती के तहत पदों की जानकारी
इस भर्ती प्रक्रिया में कर्मशाला सहायक, फोरमैन, प्रयोगशाला सहायक समेत अन्य तकनीकी पदों पर नियुक्ति की जाएगी। विभाग ने इन पदों के लिए आवश्यक नियमावली आयोग को भेज दी है, ताकि परीक्षा की प्रक्रिया को निर्धारित किया जा सके। इन पदों की भर्ती पूरी तरह से लिखित परीक्षा के माध्यम से की जाएगी, जिससे चयन में पारदर्शिता और योग्यता सुनिश्चित हो सके।
पुनः आरंभ हुई प्रक्रिया
इससे पहले पॉलिटेक्निक संस्थानों में व्याख्याता के 349 नियमित और 6 बैकलॉग पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन अकादमिक अंकों के मूल्यांकन में विवाद के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब नियमों में संशोधन के बाद विभाग ने पुनः भर्ती प्रक्रिया आरंभ करने का निर्णय लिया है, जिससे उम्मीदवारों को एक बार फिर अवसर मिलेगा।
सहायक प्राध्यापक पदों की बहाली
इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक के 126 बैकलॉग पदों को भरने के लिए भी अधियाचना झारखंड लोक सेवा आयोग को भेजी गई है। इसके अतिरिक्त, 11 बैकलॉग पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पहले ही आरंभ की जा चुकी है।
राज्य के पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थानों में अराजपत्रित पद लंबे समय से खाली पड़े थे, जिससे शिक्षण और तकनीकी कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही थी। इन पदों को भरने की मांग निरंतर उठती रही है।
युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर
इस भर्ती प्रक्रिया से राज्य के तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। साथ ही, मानव संसाधन की कमी दूर होने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की भी उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस पहल से तकनीकी शिक्षा को मजबूती मिलेगी और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
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