एसीबी ने रामगढ़ के लेखा लिपिक को 9 साल पुराने मामले में रांची से गिरफ्तार किया।

एसीबी

एक नज़र में पूरी खबर

  • एसीबी हजारीबाग ने एक सरकारी कर्मचारी अरुण कुमार को प्रत्यानुपातिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया है।
  • यह मामला 2017 में दर्ज हुआ था और कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
  • अरुण कुमार को रांची के डिपाटोली इलाके से गिरफ्तार किया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

हजारीबाग : एसीबी हजारीबाग की टीम ने एक पुरानी प्रत्यानुपातिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई करते हुए एक सरकारी कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान अरुण कुमार (56 वर्ष) के रूप में हुई है, जो उस समय ग्रामीण विकास विभाग के ग्रामीण कार्य मामले के तहत रामगढ़ में कनीय लेखा लिपिक के पद पर कार्यरत थे। एसीबी के अनुसार, आरोपी पर यह आरोप है कि उसने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की थी। उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

2017 में दर्ज हुआ था मामला

एसीबी ने जानकारी दी है कि यह मामला एसीबी थाना कांड संख्या 29/17 से संबंधित है। इस मामले में 10 अगस्त 2017 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि अरुण कुमार के पास उसकी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति है। इसके बाद एसीबी ने जांच पूरी कर पहले ही कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जारी हुआ गिरफ्तारी वारंट

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला कोर्ट में चल रहा था जब कोर्ट ने आरोपी अरुण कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। वारंट जारी होने के बाद आरोपी की तलाश शुरू की गई। वह लगातार गिरफ्तारी से बचता रहा।

रांची के डिपाटोली इलाके से की गई गिरफ्तारी

एसीबी की टीम ने आरोपी की लोकेशन का पता लगाकर उसे रांची के डिपाटोली इलाके से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी आरोपी के वर्तमान पते से हुई, जो है फ्लैट नंबर 203, आर.एल. टावर, डिपाटोली, थाना सदर, जिला रांची। एसीबी ने आरोपी को 31 मार्च 2026 को विधिवत गिरफ्तार किया।

न्यायिक हिरासत में किया गया भेजा

गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। एसीबी का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

प्रत्यानुपातिक संपत्ति का मामला क्या है?

प्रत्यानुपातिक संपत्ति का तात्पर्य है कि किसी सरकारी कर्मचारी के पास उसकी नौकरी और आय के अनुसार जितनी संपत्ति होनी चाहिए, उससे अधिक संपत्ति पाई जाए। ऐसे मामलों में एजेंसी यह जाँच करती है कि संपत्ति का स्रोत क्या है, धन किस तरह से एकत्र हुआ है और क्या इसमें भ्रष्टाचार या अनियमितताएँ शामिल हैं।

पुराने मामलों में एसीबी की कार्रवाई जारी

एसीबी हजारीबाग की इस कार्रवाई को पुराने भ्रष्टाचार मामलों में कड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लंबित मामलों में भी गिरफ्तारी और जांच की प्रक्रिया निरंतर चल रही है, ताकि भ्रष्टाचार में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

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