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एक नज़र में पूरी खबर
- झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को हटाने के निर्णय पर राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने इसे जनविरोधी और घातक बताया है।
- कैलाश यादव ने कहा कि भाषाई विवाद राज्य की एकता और विकास में बाधा डालता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ये भाषाएँ बोली जाती हैं।
- उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की कि वे इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में फिर से शामिल कराने का प्रयास करें।
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में भाषाई विवाद: कैलाश यादव की प्रतिक्रिया
रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को हटाने के निर्णय ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को गरमा दिया है। प्रदेश राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने इसे ‘जनविरोधी’ और ‘घातक’ बताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह निर्णय राज्य की एक बड़ी जनसंख्या के साथ अन्याय है, विशेषकर उन समुदायों के लिए जो इन भाषाओं का उपयोग करते हैं।
भाषाई विवाद: विकास में बाधा
कैलाश यादव ने एक प्रेस बयान में कहा कि भाषाई विवाद पैदा करना राज्य की एकता और विकास में बाधा डालता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पलामू, गढ़वा और लातेहार जैसे क्षेत्रों में अधिकांश लोग भोजपुरी और मगही बोलते हैं। इसके अलावा, औद्योगिक शहरों जैसे रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर में भी इन भाषाओं की उपस्थिति है। संथाल परगना के देवघर, दुमका, गोड्डा और साहिबगंज में भी अंगिका भाषियों की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में इन भाषाओं को नजरअंदाज करना बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का अपमान है।
मुख्यमंत्री से अपील
कैलाश यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की महागठबंधन सरकार की प्रशंसा की, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ‘जयचंद’ जैसे तत्व सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए विवादित निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वे व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करके इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में फिर से शामिल कराने का प्रयास करें।
हजारीबाग के विष्णुगढ़ कांड पर आक्रोश
प्रेस बयान में कैलाश यादव ने हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
विपक्ष को नसीहत
यादव ने विपक्षी दलों से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय पीड़ित परिवार के प्रति मानवीय संवेदना दिखाएं और उन्हें न्याय दिलाने में मदद करें। राजद ने स्पष्ट किया है कि वह भाषाई अस्मिता और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा और सभी भाषाई समुदायों को समान अवसर प्रदान करना आवश्यक समझता है।
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