झारखंड में अंबा प्रसाद का बयान: डीजीपी का नाम ‘हताशा मिश्रा’ होना चाहिए

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एक नज़र में पूरी खबर

  • कांग्रेस नेता अंबा प्रसाद ने झारखंड में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए हैं।
  • उन्होंने पुलिस हेल्पलाइन 100 और 112 की विफलता का जिक्र करते हुए पुलिस की निष्क्रियता पर कटाक्ष किया।
  • अंबा प्रसाद ने राज्य सरकार से कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की, अन्यथा जनता का विश्वास टूटने की चेतावनी दी।

झारखंड में कानून-व्यवस्था पर कांग्रेस नेता अंबा प्रसाद की टिप्पणी

रांची, 26 मार्च: बड़कागांव की पूर्व विधायक और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने झारखंड में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने डीजीपी तदाशा मिश्रा के सेवानिवृत्ति के बाद भी पद पर बने रहने को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि उनका नाम ‘तदाशा’ नहीं, बल्कि ‘हताशा मिश्रा’ होना चाहिए।

पुलिस की स्थिति पर सवाल

अंबा प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “पुलिस की मुखिया का पद अब केवल दिखावे के लिए है। रिटायरमेंट के बाद डीजीपी की नियुक्ति ने जनता का पुलिस पर विश्वास पूरी तरह से हिला दिया है। अपराधियों का मनोबल उच्च स्तर पर है, जबकि व्यवसायी बेहद डरे हुए हैं।”

पुलिस हेल्पलाइन की विफलता

उन्होंने हेल्पलाइन नंबर 100 का जिक्र करते हुए कहा कि पहले लोग सौ बार कॉल करने के बाद भी फोन नहीं उठाते थे। अब नया नंबर 112 भी स्थिति में कोई सुधार नहीं ला सका। उन्होंने बड़कागांव में एक बच्ची के गायब होने और हजारीबाग में एक किशोरी से दुष्कर्म के मामलों का उदाहरण देते हुए पुलिस की निष्क्रियता पर कटाक्ष किया।

अपराध की बढ़ती घटनाएं

अंबा प्रसाद ने कहा कि पहले गुमला हत्या के मामलों में आगे था, लेकिन अब रांची अपराध की राजधानी बन चुकी है। इस पर उन्होंने राजनीतिक तंज करते हुए कहा कि सरकार के पास रिमोट तो है, लेकिन इसकी बैटरी अमित शाह के पास है। उन्होंने इसे “स्पॉन्सर सरकार” करार दिया।

अपराधियों के संरक्षण का आरोप

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपराधी फर्जी पासपोर्ट बनाकर विदेश भाग रहे हैं और ड्रग्स का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जो कि पुलिस के संरक्षण में हो रहा है।

डीजीपी तदाशा मिश्रा का विवाद

तदाशा मिश्रा, जो 1994 बैच की IPS अधिकारी हैं, झारखंड की पहली महिला डीजीपी हैं। उनकी नियुक्ति और रिटायरमेंट (31 दिसंबर 2025) के बाद सेवा विस्तार को लेकर यूपीएससी ने आपत्ति जताई है। इस मुद्दे पर राज्य सरकार और केंद्र के बीच लंबा विवाद चल रहा है। अंबा प्रसाद का यह बयान उस समय आया है जब झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। उन्होंने अपनी ही गठबंधन सरकार की पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाकर राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

राज्य सरकार से मांग

अंबा प्रसाद ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि कानून-व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, अन्यथा जनता का विश्वास पूरी तरह से टूट जाएगा।

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