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एक नज़र में पूरी खबर
- मायावती ने स्पष्ट किया कि बसपा आगामी विधानसभा चुनावों में सत्ता में आने के लक्ष्य के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी।
- उन्होंने जातिवादी शोषण और गरीब विरोधी शासन से छुटकारा पाने के लिए 'सत्ता की मास्टर चाबी' अपने हाथ में लेने पर जोर दिया।
- मायावती ने दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, और अल्पसंख्यकों के वास्तविक विकास के लिए BSP की मजबूती को आवश्यक बताया।
मायावती का विधानसभा चुनावों के लिए स्पष्ट संदेश
नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि बसपा केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता में आने के लक्ष्य के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी। हाल ही में मध्य प्रदेश, बिहार, और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ आयोजित एक विस्तृत बैठक में उन्होंने अपनी जीत की योजना साझा की। इस बैठक में पिछले समय की रणनीतियों की समीक्षा भी की गई और मायावती ने पार्टी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और जनाधार बढ़ाने पर जोर दिया।
सत्ता की मास्टर चाबी पर जोर
मायावती ने आगामी राजनीतिक परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने लखनऊ में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मध्य प्रदेश, बिहार, और छत्तीसगढ़ की पार्टी समितियों के साथ अपने विचार साझा किए। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि जातिवादी शोषण और गरीब विरोधी शासन से छुटकारा पाने का एकमात्र उपाय ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ अपने हाथ में लेना है। उन्होंने इन राज्यों के पदाधिकारियों को मिशनरी भावना के साथ कार्य करने का निर्देश दिया।
भावनात्मक अपील
बैठक के दौरान मायावती ने भावुकता के साथ कहा कि मान्यवर कांशीराम जी के मिशन को पूरा करने के लिए वह पूरी मेहनत से जुटी हैं। उन्होंने बताया कि जब-जब BSP मजबूत हुई है, तब-तब दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, और अल्पसंख्यकों का वास्तविक विकास हुआ है। चुनावी सफलता अब समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए मायावती ने कहा कि केवल अंबेडकरवादी आंदोलन को आगे बढ़ाकर ही बहुजन समाज अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।
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