Table of Contents
एक नज़र में पूरी खबर
- अनाया बांगर, जो पहले आर्यन बांगर के नाम से जानी जाती थीं, ने थाईलैंड में अपनी जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की है।
- संजय बांगर ने अपनी बेटी अनाया का हमेशा समर्थन किया है, जिससे यह साबित होता है कि परिवार का प्यार और स्वीकार्यता कितनी महत्वपूर्ण होती है।
- अनाया ने क्रिकेट खेलने में कठिनाइयों का सामना किया, जिसमें ताने और उत्पीड़न शामिल थे, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को कभी छुपाया नहीं।
पिता-पुत्री का अद्भुत सफर: संजय बांगर और अनाया बांगर की कहानी
एक पिता का अपने बेटे को क्रिकेट के मैदान पर चौके और छक्के लगाते देखना, उसे भारतीय क्रिकेट का भविष्य मानना, और फिर अचानक उसी बेटे का यह कहना कि वह असल में एक लड़की है, किसी फिल्म की कहानी के समान प्रतीत होता है। लेकिन यह सच है, और यह कहानी है पूर्व भारतीय क्रिकेटर और बैटिंग कोच संजय बांगर और उनके बच्चे की। इस चुनौतीपूर्ण, परंतु खूबसूरत यात्रा में संजय बांगर ने अपने बच्चे का हमेशा समर्थन किया, जैसे एक चट्टान।
थाईलैंड में जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी
आर्यन बांगर, जिन्होंने मुंबई और पुडुचेरी के लिए अंडर-19 स्तर पर क्रिकेट खेला, अब आधिकारिक रूप से अनाया बांगर बन चुकी हैं। अनाया ने थाईलैंड में अपनी जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। हालांकि, इस चिकित्सा प्रक्रिया की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है उस स्वीकार्यता की कहानी, जो एक पिता ने अपनी बेटी को दी है।
अस्पताल का वो पल और पिता का हाथ
अनाया ने थाईलैंड के अस्पताल से एक भावुक तस्वीर साझा की है, जिसमें वह बिस्तर पर हैं और उनके पिता संजय बांगर उनके पास खड़े हैं। अनाया के द्वारा लिखा गया संदेश सीधे दिल को छू जाता है। उन्होंने कहा, “मेरी ज़िंदगी के सबसे बड़े पलों में मेरे पिता का मेरे साथ होना, मेरे लिए पूरी दुनिया है। यह साथ मुझे रातों-रात नहीं मिला, लेकिन जब मिला, तो वह बेहद सच्चा, बिना किसी शर्त का और अटूट था।” अनाया की ये भावनाएँ इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आर्यन से अनाया बनने का यह सफर उनके परिवार के लिए कितना कठिन रहा होगा।
क्रिकेट से दूरियां, ताने और हिम्मत
अनाया एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर बनना चाहती थीं, लेकिन 2023 में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) शुरू करने के बाद शरीर में हो रहे परिवर्तनों के कारण क्रिकेट खेल पाना उनके लिए संभव नहीं रहा। खेल के दौरान उन्हें तानों और उत्पीड़न का सामना भी करना पड़ा।
पिता के प्यार का महत्व
अनाया ने अपनी वास्तविक पहचान को कभी छुपाया नहीं। आज जब समाज में ऐसे मुद्दों पर चर्चा करने से लोग कतराते हैं, संजय बांगर का अपनी बेटी का हाथ थामकर दुनिया के सामने खड़े होना, एक महत्वपूर्ण संदेश है। प्यार में समय जरूर लगता है, लेकिन जब वह मिलता है, तो हर कठिनाई आसान हो जाती है।
इस खबर से जुड़ी अन्य खबरें
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!