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एक नज़र में पूरी खबर
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर के बदले कमीशन लेने के मामले में पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की, जिसमें 14 और इंजीनियरों एवं अधिकारियों को आरोपित किया गया है, जिससे कुल आरोपियों की संख्या 36 हो गई है।
- जांच में पता चला है कि ठेकेदारों से टेंडर दिलाने के बदले लगभग 3% कमीशन लिया जाता था, जिसमें 1.35% हिस्सा तत्कालीन मंत्री, 0.65% से 1% विभागीय सचिव और बाकी राशि चीफ इंजीनियर एवं अन्य अधीनस्थ इंजीनियरों में बांटी जाती थी।
- यह मामला 2019 में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज FIR से प्रारंभ हुआ था, जिसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के दृष्टिकोण से जांच शुरू की और अब तक 52 स्थानों पर छापेमारी, 9 गिरफ्तारियां और 44 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया गया है।
रांची: झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर के बदले कमीशन लेने के मामले में नई जानकारी सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस सिलसिले में अपनी पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है, जिसमें 14 और इंजीनियरों एवं अधिकारियों को आरोपित किया गया है। इस प्रकार, कुल आरोपियों की संख्या 36 हो गई है। ED ने 17 मार्च 2026 को रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में यह चार्जशीट प्रस्तुत की। जांच एजेंसी के अनुसार, विभाग में एक संगठित नेटवर्क बनाकर टेंडर के लिए निर्धारित कमीशन लिए जाने की पुष्टि हुई है।
कमीशन का तंत्र कैसे काम करता था
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ठेकेदारों से टेंडर दिलाने के बदले लगभग 3% कमीशन लिया जाता था। इस रकम का वितरण पहले से तय होता था:
- लगभग 1.35% हिस्सा तत्कालीन मंत्री को जाता था
- 0.65% से 1% तक विभागीय सचिव को प्राप्त होता था
- बाकी राशि चीफ इंजीनियर और अन्य अधीनस्थ इंजीनियरों में बांटी जाती थी
ED के अनुसार, कुल 3048 करोड़ रुपए के टेंडर में यह कमीशन का खेल चल रहा था, जिससे 90 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध आय हुई।
नई चार्जशीट में नामित अधिकारी
नए आरोपियों में कई वरिष्ठ और रिटायर्ड अधिकारी शामिल हैं, जैसे कि चीफ इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और एक पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ स्तर का अधिकारी। जांच में पता चला है कि ये अधिकारी कमीशन की वसूली, उसके इकट्ठा करने और उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने में संलग्न थे।
2019 से प्रारंभ हुई जांच
यह मामला 2019 में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), जमशेदपुर में दर्ज FIR से प्रारंभ हुआ था। इसके पश्चात, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के दृष्टिकोण से जांच शुरू की और धीरे-धीरे इस नेटवर्क को उजागर किया।
अब तक की कार्रवाई का विवरण
- 52 स्थानों पर छापेमारी (झारखंड, बिहार और दिल्ली में)
- 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया
- 44 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया गया
- लगभग 38 करोड़ रुपए कैश में बरामद किए गए
- 8 भव्य वाहन जब्त किए गए
गिरफ्तार आरोपियों में पूर्व मंत्री, उनके निजी सचिव और सहयोगी शामिल हैं, जो वर्तमान में जेल में हैं।
पहले की चार्जशीट्स
इससे पहले भी ED इस मामले में एक प्रमुख और चार सप्लीमेंट्री चार्जशीट प्रस्तुत कर चुकी है। अदालत ने इन पर संज्ञान लिया है। अब पांचवीं चार्जशीट में नए नाम जुड़ने से मामला और मजबूत होने की संभावना बढ़ी है।
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